जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : ऊर्जा निगम की ओर से गलत और अत्यधिक बिजली बिल जारी किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पौड़ी ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता की अदालत ने सुनाया।
शिकायतकर्ता पौड़ी निवासी दामोदर प्रसाद ममगाईं को ऊर्जा निगम की ओर से जनवरी 2023 में बिना मीटर रीडिंग के 92,972 रुपये का बिजली बिल जारी किया गया था। बिजली कटने के भय से उन्होंने 31 मार्च 2023 को दबाव में आकर 40 हजार रुपये जमा किए। आयोग में प्रस्तुत साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि पहले के सभी बिजली बिलों का भुगतान किया जा चुका था। इसके बावजूद बिना ठोस आधार और मीटर रीडिंग के अत्यधिक व अनुमानित बिल जारी किया गया। आरटीआई के तहत विभाग ने स्वयं स्वीकार किया कि गलत आरडीएफ (रीडिंग खराब/गलत) बिलों के कारण अतिरिक्त वसूली हुई थी, जिसे बाद में समायोजित किया गया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिना मीटर रीडिंग के बार-बार विरोधाभासी और मनमाने बिल जारी करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने विभाग को भविष्य में बिना विधिवत मीटर रीडिंग के अनुमानित बिल जारी न करने के निर्देश भी दिए। आदेश के अनुसार विभाग को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता दामोदर प्रसाद ममगाईं को कुल 55 हजार रुपये का भुगतान करना होगा।आयोग ने विद्युत वितरण खंड पौड़ी को उपभोक्ता से वसूले गए 40 हजार रुपये लौटाने के साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। तय समय में आदेश का पालन न होने पर आयोग ने विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।