लाल किला कार विस्फोट मामले में एनआईए की आरोपपत्र पर अदालत ने लिया संज्ञान, 13 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ

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-9 सितंबर को अगली सुनवाई
नई दिल्ली,दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट मामले में जांच अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने मामले में एनआईए की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया है। अदालत के इस कदम के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।
एनआईए ने अपनी जांच के आधार पर कुल 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। इसमें उमर-उन-नबी, आमिर राशिद अली, जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल, आदिल अहमद राथर, मुफ्ती इरफान अहमद, शाहीन, सोयाब, बिलाल और यासिर अहमद डार समेत अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसी ने कहा है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिकाओं का उल्लेख आरोपपत्र में किया गया है। इनमें उमर-उन-नबी की विस्फोट में मौत हो चुकी है, जबकि मामले से जुड़ा एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है।
मामले की जांच दिल्ली तक सीमित नहीं रही। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित कई राज्यों और इलाकों में जांच की।
जांच एजेंसी ने अलग-अलग स्थानों से जानकारी जुटाने के साथ आरोपियों के संभावित संपर्कों और विस्फोट से जुड़ी कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर घटनाक्रम और आरोपियों की कथित गतिविधियों की पड़ताल की गई।
एनआईए के आरोपपत्र में बड़ी संख्या में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान 588 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
इसके अलावा 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त वस्तुओं को भी मामले की जांच का हिस्सा बनाया गया है। एनआईए का कहना है कि इन साक्ष्यों के आधार पर विस्फोट से जुड़े घटनाक्रम, आरोपियों की कथित भूमिका और उनके बीच संभावित संपर्कों से संबंधित जानकारी अदालत के सामने रखी गई है।
अदालत द्वारा आरोपपत्र पर संज्ञान लिए जाने के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में आरोपपत्र में प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर सुनवाई होगी।
हालांकि, आरोपपत्र में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि या निर्दोषता का अंतिम फैसला अदालत में पूरी न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

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