बॉन्डधारी 130 डॉक्टर बेरोजगार, राज्य में वैकेंसी न होने से स्वास्थ्य विभाग परेशान

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हल्द्वानी(। उत्तराखंड में बॉन्डधारी एमबीबीएस पास डॉक्टरों की नियुक्ति को लेकर स्वास्थ्य विभाग मुश्किल में फंस गया है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने 28 फरवरी को बॉन्डधारी डॉक्टरों की सूची महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं को भेज दी है, जिसमें करीब 130 डॉक्टर शामिल हैं। लेकिन राज्य में इनकी नियुक्ति के लिए पर्याप्त वैकेंसी उपलब्ध नहीं होने से विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन डॉक्टरों को तैनाती देने की है, क्योंकि बॉन्ड के नियमों के अनुसार उन्हें तीन साल तक पर्वतीय क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य सेवा देनी होती है। उत्तराखंड के कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सब्सिडाइज्ड फीस पर एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में सेवा देने का बॉन्ड भरना पड़ता है। यदि वे सेवा नहीं देते हैं तो उन्हें भारी जुर्माना ( करोड़ों रुपये) भरना पड़ता है। हालांकि अब स्थिति उलटी है डॉक्टर सेवा देने को तैयार हैं, पर विभाग के पास पद ही नहीं हैं।बर्खास्त डॉक्टरों की जगह मिलने की उम्मीदमेडिकल कॉलेजों से पास हुए बॉन्डधारी डॉक्टरों को पहले स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में तैनाती दी थी, लेकिन इनमें से कई डॉक्टर वर्षों तक तैनाती स्थल से गायब रहे। इसके बाद सरकार ने पिछले साल जुलाई में 234 बॉन्डधारी डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया था। हालांकि बर्खास्तगी की प्रक्रिया अभी किस चरण में है, इसकी स्पष्ट जानकारी अधिकारियों के पास भी नहीं है। माना जा रहा है कि इन बर्खास्त डॉक्टरों के पदों पर श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के नए बॉन्डधारी डॉक्टरों को नियुक्ति दी जा सकती है।स्वास्थ्य नीति पर उठ रहे सवालडॉक्टरों की वैकेंसी को लेकर राज्य सरकार की स्वास्थ्य नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि विभाग में नए पद सृजित नहीं होने के कारण कई एमडी और एम्स से पढ़े डॉक्टरों को भी नियुक्ति नहीं मिल पा रही है। ऐसे में एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए भी पदों की कमी के बावजूद नए मेडिकल कॉलेज खोलने की सरकारी योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को लखनऊ और चंडीगढ़ की तर्ज पर पीजी मेडिकल कॉलेज खोलने पर भी ध्यान देना चाहिए, जिससे राज्य को विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकें और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो सके।कार्यस्थल से गायब रह रहे बांडधारी डॉक्टरों को बीते साल सरकार ने बर्खास्त करने के निर्देश दिए हैं। नए बांड धारी डॉक्टरों को इनकी जगह पर नियुक्ति दी जाएगी, इसकी प्रक्रिया चल रही है।- डॉ. सुनीता टम्टा, महानिदेशक, स्वास्थ्य विभाग

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