शेष आपत्तियों पर रविवार सुबह 11 बजे से तहसील में होगी सुनवाई
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : नगर निगम चुनाव में आरक्षण की स्थिति को लेकर 190 आपत्तियां दर्ज की गई है। जिसमें से पचास आपत्तियों पर शनिवार को सुनवाई की गई। शेष आपत्तियों पर रविवार सुबह 11 बजे से तहसील परिसर में सुनवाई की जाएगी। इस दौरान अधिकांश लोग वार्डों में आरक्षण की स्थिति को लेकर असंतुष्ट ही दिखे।
शनिवार को तहसील में वार्डों की स्थिति को लेकर दर्ज आपत्तियों पर सुनवाई की गई। उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में लोगों ने आरक्षण की स्थिति को पूर्व की भांति रखने पर रोष व्यक्त किया। कुछ आपत्तिकत्र्ता अपनी आपत्ति के जवाब को सुन शांतिपूर्ण तरीके से वापस लौट रहे थे, जबकि कुछ वार्डों में आरक्षण की स्थिति न बदले जाने पर भड़कते नजर आए। अधिकांश लोगों का कहना था कि धरातल की स्थिति को जाने बिना ही आरक्षण को यथावत रख दिया गया। बालासौड़ निवासी राजाराम अण्थवाल का कहना था कि यदि 2011 की जनसंख्या के अनुसार आरक्षण का निर्धारण किया गया है तो महापौर की सीट भी पूर्व की भांति महिला आरक्षित होनी चाहिए थी। मौके पर मौजूद कई अन्य लोगों ने उनकी बात का समर्थन किया। कहा कि आरक्षण करने से पहले धरातल की स्थिति को जानना आवश्यक था। कई लोगों ने वार्डों के इस आरक्षण के खिलाफ न्यायालय में जाने की बात कही। सबसे अधिक आपत्तियां शिवपुर क्षेत्र में वार्ड संख्या 18 से आई हैं। यहां से शनिवार दोपहर तक 94 आपत्तियां दर्ज की गई। इसके अलावा पश्चिमी झंडीचौड़ वार्ड संख्या-37 से 26 और लकड़ीपड़ाव वार्ड संख्या-05 से 17 आपत्तियां आई हैं। क्षेत्र के 21 वार्डों से कोई आपत्ति नहीं आई है। उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी ने बताया कि अभी तक 190 आपत्तियां दर्ज हुई, जिनमें से 50 आपत्तियों को शनिवार को सुना गया। शेष आपत्तियों पर रविवार सुबह 11 बजे से सुनवाई प्रारंभ होगी।
अनदेखी पर रोष
वार्ड नंबर 22 सिम्मलचौड़ निवासी विकास कुमार आर्य ने नगर निगम चुनाव में दोबारा वार्ड की पार्षद सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने पर रोष व्यक्त किया है। कहा कि इससे सामान्य वर्ग के लोगों की अनदेखी की जा रही है। इस सबंध में विकास आर्य ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा। बताया कि गत चुनाव में भी वार्ड 22 सिम्मलचौड़ वार्ड की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई थी। जबकि, इस बार इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। बावजूद इसके स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिसके कारण सामान्य जाति के परिवार चुनाव लड़ने से वंचित रह रहे हैं। कहा कि इस पर गंभीरता से ध्यान देते हुए सीट को सामान्य किया जाना चाहिए।