हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में 30 नई पीजी सीटें बढेंगी

Spread the love

हल्द्वानी(। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी एवं सुशीला तिवारी अस्पताल में उच्च चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। कॉलेज प्रशासन ने 11 विभागों में 30 नई पीजी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। खास बात यह है कि पहली बार मनोरोग (साइकेट्री) विभाग में भी पीजी कोर्स शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, दूसरी ओर फैकल्टी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अब भी गंभीर बनी हुई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गोविंद सिंह तितियाल ने बताया कि फैकल्टी बढ़ाने के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि बीते वर्ष कॉलेज को 13 नई पीजी सीटें मिली थीं, जिससे कुल सीटों की संख्या 82 तक पहुंच गई। इस वर्ष 11 विभागों में 30 अतिरिक्त पीजी सीटों के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को जल्द ही एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्रत्येक पीजी सीट के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट मिलता है, जिसका उपयोग संसाधन, उपकरण और अधोसंरचना मजबूत करने में किया जाता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो कॉलेज में पीजी सीटों की कुल संख्या 112 तक पहुंच जाएगी, जिससे क्षेत्र के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। 100 डॉक्टरों की जरूरत, पहुंचे सिर्फ 27 हालांकि, मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। वर्तमान में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के करीब 100 पद खाली हैं। इन्हें भरने के लिए हाल ही में कराए गए साक्षात्कार में 27 डॉक्टर चयनित हुए, लेकिन अब तक केवल दो-तीन डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया है। हृदयरोग विशेषज्ञ समेत कई विभागों में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की पहले से ही कमी चल रही है, जिससे मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। इन विभागों में 30 नई पीजी सीटों का प्रस्ताव एनेस्थीसिया-3, माइक्रोबायोलॉजी-3, नेत्र-2, ईएनटी-2, प्रिवेंटिव सोशल मेडिसिन-2, टीबी एंड चेस्ट-4, बायोकैमेस्ट्री-2, डर्मटोलॉजी-3, आर्थोपेडिक-3, फिजियोलॉजी-3, रेडियोथेरेपी-3 पीजी सीटों की वर्तमान स्थिति (कुल 82 सीटें) जनरल मेडिसिन-12, एनेस्थीसिया-9, जनरल सर्जरी-8, पैथालॉजी-8, स्त्री एवं प्रसूति-7, बाल रोग-6, फार्माकोलॉजी-5, ईएनटी-4, एनाटॉमी-4, नेत्र-3, बायोकैमेस्ट्री-3, डर्मटोलॉजी-2, आर्थोपेडिक-2, फिजियोलॉजी-2, प्रिवेंटिव सोशल मेडिसिन-2, रेडियोथेरेपी-2, टीबी एंड चेस्ट-1 ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *