ऋषिकेश(। चारधाम ट्रांजिट केंद्र की बिल्डिंग में शुक्रवार को अचानक आग लग गई। भीषण आग में बच्चों और बुजुर्गों समेत 80 यात्री ट्रांजिट केंद्र में फंस गए। सूचना पर राहत-बचाव से संबंधित महकमों की टीम मौके पर पहुंची और विद्युत आपूर्ति बाधित कर एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों ने यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। यह सब सुरक्षा इंतजामों को परखने के लिए मॉक ड्रिल के दौरान किया गया। सुबह करीब 11 बजे ड्रिल की शुरूआत हुई, जो कि लगभग दो घंटे तक चली। एसडीएम योगेश मेहरा के मुताबिक मुख्यतौर पर राहत-बचाव से संबंधित विभागों को रिस्पांस टाइम बेहतर दिखा। समन्वय ठीक होने की वजह से यात्रियों के रेस्क्यू में किसी तरह की रुकावट नहीं आई। उन्होंने बताया कि यात्राकाल में सैंकड़ों की संख्या में यात्रियों की भीड़ रजिस्ट्रेशन के लिए ट्रांजिट केंद्र में जुटेगी। उनकी सुरक्षा को चौकस रखने के लिए इस तरह की ड्रिल पहले और अब भी की गई है। ड्रिल में राहत-बचाव में आपात स्थिति में आवश्यक सुधार को लेकर भी संबंधित महकमों के अधिकारियों को अवगत कराया गया है। मौके पर सीओ नीरज सेमवाल, एआरटीओ रावत सिंह, कोतवाल कैलास चंद्र भट्ट, पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली, सहायक नगर आयुक्त अमन कुमार, एसएसआई भारत सिंह रावत आदि शामिल रहे।
पहले भी दो बार हो चुकी है मॉक ड्रिल:
साल की शुरूआत से अभीतक तीन बार मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा चुका है। दो बार ड्रिल त्रिवेणीघाट और चारधाम ट्रांजिट केंद्र में हुई हैं। जबकि, इस बार की मॉक ड्रिल सिर्फ ट्रांजिट केंद्र तक ही सीमित रही है। सीओ नीरज सेमवाल ने बताया कि इस तरह की ड्रिल का उद्देश्य जन सुरक्षा को और ज्यादा पुख्ता करना होता है। आपात स्थिति में राहत-बचाव से संबंधित महकमों के अधिकारियों और जवानों के कामकाज के तौर-तरीकों को परखा जाता है। कमी मिलने पर सुधार के लिए सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए जाते हैं।