भाषा संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान की संवाहक : प्रो. कुलश्रेष्ठ

एनईपी 2020 अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ
जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल : हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) एवं मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के 96 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने भाषा के महत्त्व को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान की संवाहक भी है। मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, स्थानीय ज्ञान, लोकपरंपराओं तथा पूर्वजों के अनुभवों से जोड़ना संभव है।


कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक बहुआयामी, कौशल-आधारित, विद्यार्थी-केंद्रित तथा रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि यूजीसी-एमएमटीटीसी का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता एवं व्यावसायिक क्षमताओं को विकसित करना है, ताकि वे नई शिक्षा नीति की भावना को कक्षाओं में प्रभावी रूप से लागू कर सकें। मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में बहुविषयक शिक्षा, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण तथा परिणामोन्मुख शिक्षा के महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोणों को अपने शिक्षण एवं शोध कार्यों में अपनाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान नई दिल्ली के विशेषज्ञ प्रो. कुमार सुरेश ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में सामान्य शिक्षा और कौशल शिक्षा के बीच समन्वय स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तनकारी पहल है, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता, रोजगार परक कौशल तथा नवाचार की क्षमता प्रदान करने पर बल देती है। प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने कहा कि अंतरपीढ़ीगत संबंध केवल परिवार के वरिष्ठ एवं युवा सदस्यों के बीच भावनात्मक जुड़ाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये अनुभव, ज्ञान, संस्कृति, भाषा, जीवन-मूल्यों तथा परंपराओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं। परिवार और समाज में विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद एवं पारस्परिक सम्मान से ज्ञान की निरंतरता बनी रहती है तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है। इस मौके पर मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव, डीन, सीडीपी प्रो. नंदिनी श्रीवास्तव, यूजीसी-एमएमटीटीसी के डॉ. सोमेश थपलियाल, डॉ. अमरजीत सिंह परिहार, मानव रचना विश्वविद्यालय के उपनिदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. संजय कुमार, पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. प्रियंका सिंह उपस्थित रहे।

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