डोभाल की लिखी सौंगों गढ़वाली व्याकरण का हुआ लोकापर्ण

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रुद्रप्रयाग। प्रसिद्घ रंगकर्मी, मूर्तिकार एवं साहित्यकार प्रेममोहन डोभाल द्वारा लिखी सौंगों गढ़वाली व्याकरण का रविवार को लोकार्पण किया गया। डोभाल के अथक प्रयासों से तैयार गढ़वाली व्याकरण आम जन मानस को समर्पित कर दी गई है। इसको अनलाइन प्राप्त करने के लिए एमैजन पर भी बुकिंग की जा सकती है। अपर बाजार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संस्त महाविद्यालय रुद्रप्रयाग के वेदाचार्य आचार्य राम प्रसाद उपाध्याय, कलश के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल, लोक कवि जगदंबा चमोला, नंदन सिंह राणा ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। अतिथियों ने आज के समय में गढ़वाली बोलीध्भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए इस तरह के प्रयासों को प्रासांगिक बताया। वेदाचार्य उपाध्यक्ष ने कहा कि व्याकरण भाषा को अनुशासित करती है। उन्होंने हिंदी, संस्त और गढ़वाली में व्याकरण के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। लेखक डोभाल का यह कदम, गढ़वाली बोलीध्भाषा को विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा। पुस्तक के लेखक प्रेम मोहन डोभाल ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से गढ़वाली व्याकरण लेखन पर काम कर रहे थे। कहा कि, इस कार्य के लिए उन्होंने कई लोगों से विचार-विमर्श करते हुए पुस्तक को अंतिम रूप दिया। उन्होंने अपनी भावी योजनाओं के बारे में बताया कि वह आठ गढ़वाली नाटक लिख रहे हैं, जिनका जल्द प्रकाशन किया जाएगा। साथ ही पंचतंत्र की कहानियों का भी गढ़वाली में अनुवाद करेंगे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गढ़वाली व्याकरण से नई पीढ़ी भी अपनी बोलीध्भाषा में बेहतर काम कर सकेगी। इस मौके पर प्रेममोहन डोभाल, ओमप्रकाश सेमवाल, कवि जगदम्बा चमोला, वरिष्ठ व्यापारी ओमप्रकाश भट्ट, कवि नंदन राणा, सतेश्वरी डोभाल, पत्रकार विनय बहुगुणा, बद्री नौटियाल, ईशान डोभाल, सुशांत भट्ट सहित अन्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन कलश ट्रस्ट के संयोजक ओपी सेमवाल ने किया।

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