देहरादून। स्कूल में छात्र से अभद्रता या मारपीट के मामले में केवल अभिभावकों की शिकायत पर शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई ना हो। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को सुनकर ही अधिकारी किसी तरह की कार्रवाई करें। राजकीय शिक्षक संघ देहरादून की जनपद एवं ब्लॉक कार्यकारिणी की जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय मयूर विकार में हुई बैठक में ये मांग उठी। बैठक में 10 अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। बैठक में पहली मांग जनवरी 2025 के नगर निकाय चुनाव के दौरान शीतावकाश में लगाए गए कार्य के बदले उपार्जित अवकाश प्रदान किए जाने की रही। संघ ने राबाइंका रानीपोखरी से जुड़े प्रकरण पर भी 22 मई 2025 का लंबित वेतन तुरंत आहरित करने की मांग उठाई। ब्लॉक कालसी और डोईवाला में आकस्मिक अवकाश और बाल्य देखभाल अवकाश पर लगाई गई रोक को अनुचित बताते हुए इसे हटाने और बिना कारण वेतन बाधित करने की प्रथा पर रोक लगाने की भी मांग रखी गई। संघ ने मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिक्षकों के प्रकरणों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण हेतु ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने, निर्धारित प्रपत्रों और आवश्यक संलग्नकों की स्पष्ट सूची जारी करने और निस्तारण की समय-सीमा तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को अन्य शिक्षकों की तरह एक समान सेवा लाभ देने, भारत भ्रमण कार्यक्रमों में साथ जाने वाले शिक्षकों का प्रतिभाग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने, और कनिष्ठ-वरिष्ठ वेतन विसंगति वाले लंबित प्रकरणों का तुरंत निस्तारण करने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी अभिभावक की शिकायत पर कार्यवाही से पहले दोनों पक्षों को सुनना अनिवार्य किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। वहीं, ग्रीष्मकालीन अवकाश (जून) में आयोजित होने वाले समर कैंप के प्रतिकर अवकाश की अनिवार्य उपभोग बाध्यता समाप्त करने की बात भी शामिल की गई। शिक्षक हित में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह रहा कि राप्रावि गोहरीमाफी को रामावि गोहरीमाफी में विलय किया जाए। ताकि छात्र सुविधा और शैक्षणिक वातावरण बेहतर हो सके। बैठक में संघ के जिलाध्यक्ष सुभाष झल्डियाल और जिलामंत्री अर्जुन पंवार सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।