अदवानी क्षेत्र में 25 मार्च को मनाया जाएगा आड़ा दिवस

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वनाग्नि रोकथाम के लिए जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण
जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : अदवाणी वन क्षेत्र में विगत वर्षों के सैटेलाइट डेटा व अन्य स्रोतों के अनुसार वनाग्नि का मुख्य स्रोत नापखेत पाए गए हैं, क्योंकि इस वन क्षेत्र से लगभग 30 गांव लगे हुए हैं। जहां गर्मियों में कृषक अपने खेतों का आड़ा जलाते हैं और लापरवाही के कारण आग जंगलों की ओर फैल जाती है।
एसडीओ गढ़वाल प्रभाग आयषा बिष्ट ने बताया कि वनाग्नि रोकथाम के लिए जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए पौड़ी गढ़वाल में वन विभाग द्वारा अल्मोड़ा के शीतलाखेत मॉडल की तर्ज पर रानीगढ़ अदवाणी वन बंधु समिति का गठन पूर्व में किया गया है। समिति के सभी सदस्यों द्वारा आड़ा दिवस मनाए जाने पर सहमति दी गई। उन्होंने कहा कि 25 मार्च को अदवाणी वन से सटे सभी गांवों में आड़ा दिवस आयोजित किया जाएगा। जिसमें सभी ग्रामीण सावधानी पूर्वक अपने खेतों का आड़ा जलाएंगे और इस दिन के बाद क्षेत्र में कोई भी आड़ा नहीं जलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में समिति के सभी सदस्य (ग्राम प्रधान, वन पंचायत सरपंच, ग्राम प्रहरी, युवक मंगल दल, महिला मंगल दल, पटवारी एवं अग्निशमन विभाग के कर्मचारी) वन विभाग के साथ मिलकर आड़ा दिवस का सफल आयोजन करेंगे। उन्होंने सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लें और वनाग्नि रोकथाम में अपना सहयोग दें।

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