जनगणना के कार्यों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवतापूर्ण संपादित करे : एडीएम

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प्रथम चरण में मकान सूचिकारण एवं मकानों की गणना, द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना
जयन्त प्रतिनिधि।
चमोली : अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने बताया कि जनपद स्तर पर समस्त संबंधित अधिकारी, चार्ज अधिकारी, चार्ज सहायक एवं अन्य कर्मचारियों की 19 से 21 फरवरी तक प्रशिक्षण आयोजित किया जाना है। आगामी जनगणना 2027 के दृष्टियों से ऐतिहासिक एवं विशेष है, क्योंकि यह प्रथम अवसर होगा जब संपूर्ण जनगणना शत-प्रतिशत डिजिटल के माध्यम से संपादित की जाएगी। अपर जिलाधिकारी ने जनपद स्तर पर समस्त संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि वे जनगणना-2027 के कार्य को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्यों को संपादित करना सुनिश्चित करें। साथ ही अपने क्षेत्रांतर्गत जन जागरूकता अभियान भी चलाए।
प्रगणक एवं पर्यवेक्षक अपने स्वयं के मोबाइल फोन के माध्यम से आंकड़ों का संकलन करेंगे, साथ ही आरंभ से अंत तक संपूर्ण संरचना, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन हेतु जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जिसे इस बार जनगणना का ‘मस्तिष्क’ कहा जा सकता है। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य में प्रथम चरण का कार्य, दिनांक 25 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 तक किया जाना प्रस्तावित हैं। यह कार्य घर-घर जाकर क्षेत्रीय सर्वेक्षण के रूप में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, स्व-गणना के कार्य की अवधि 10 अप्रैल 2026 से 24 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित है। इस सुविधा के अंतर्गत परिवारों को प्रथम बार एक वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही प्रगणक द्वारा उक्त विवरण का सत्यापन कर आंकड़ों का संकलन किया जागा। उन्होंने बताया कि द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना की जायेगी। यह चरण 09 फरवरी 2027 से 28 परवरी 2027 तक संचालित होगा। उत्तराखंड राज्य के हिमाच्छादित के क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान के अंतर्गत जनसंख्या गणना 11 सितंबर 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक किया जाना प्रस्तावित है। जनपद के प्रत्येक तहसील एवं नगर को एक विशिष्ट जनगणना चार्ज के रूप में चिन्हित किया जाएगा। प्रत्येक चार्ज में एक चार्ज अधिकारी नामित किया जाएगा, जो जनगणना कार्य का प्रमुख दायित्व निभाएगा। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत डिजिटल प्रणाली लागू होने से डेटा की गुणवत्ता, सटीकता एवं त्वरित संकलन में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है, जो पूर्वर्ती जनगणना की तुलना में अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी होगा।

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