विकासनगर। एटनबाग निवासी आकाश मुल्तानी पिछले तीन वर्षों से धीरे-धीरे विलुप्ति के कगार पर जा चुकी गौरिया के संरक्षण के लिए जनरेटर के खराब फिल्टर एवं अन्य स्क्रिप्ट मटेरियल से कृत्रिम घोसलों का निर्माण कर रहे हैं। उनका कहना है कि गौरिया हम मनुष्यों के बीच में रहने वाली पक्षी है। लेकिन आज कंक्रीट से बने मकान में इनके आशियाने के लिए कोई उपयुक्त जगह नहीं बची। जिस कारण इनका जीवन बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है। धीरे-धीरे यह नन्ही चिड़िया विलुप्ति की कगार पर आ पहुंची है। इस नन्ही चिड़िया का संरक्षण बहुत आवश्यक है। आकाश मुल्तानी ने बताया कि वह एक टावर कंपनी में कार्यरत है। जहां पर डीजल जेनरेटों का इस्तेमाल होता है। जब वह टावर पर विजिट के लिए जाते थे तो जनरेटर के साइलेंसर के अंदर गौरैया अपना घोंसला बना देती थी। जब जनरेटर चलाया जाता था तो धुएं के साथ उनके घोंसले भी बाहर आकर गिर जाता था। जिसमें कभी बच्चे तो कभी अंडे होते थे। जो नष्ट हो जाते थे। इन घटनाओं से वह बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने गौरिया संरक्षण का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने जनरेटर से निकलने वाले पुराने एयर फिल्टर की मदद से घोसले बनाकर लगाने शुरू किए। कुछ समय बाद लगभग सभी में चिड़िया ने अपना आशियाना बनाया। कहा कि गोरिया हम मनुष्यों के बीच में रहने वाली पक्षी है। लेकिन धीरे-धीरे यह नन्ही चिड़िया विलुप्ति की कगार पर आ पहुंची है इस नन्ही चिड़िया का संरक्षण बहुत आवश्यक है। परंतु विडंबना यह है कि इनके संरक्षण के लिए कोई चिंतित नहीं है। हमें कृत्रिम घोसला लगाने चाहिए तथा घरों की छत पर दाना पानी एवं वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए। इसी तरह हम इस नन्ही चिड़िया का संरक्षण कर पाएंगे।