नई दिल्ली , भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित देश के सबसे उन्नत परमाणु रिएक्टर, प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (क्कस्नक्चक्र) ने ‘क्रिटिकैलिटीÓ के अहम स्टेज को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ ही भारत अब परमाणु ईंधन के लिए दूसरे देशों की मोहताज से हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगा और दुनिया की एक नई परमाणु महाशक्ति बनकर उभरेगा। ‘क्रिटिकैलिटीÓ का मतलब है कि अब यह रिएक्टर बिना किसी बाहरी दखल के अपने आप परमाणु विखंडन (एटॉमिक रिएक्शन) के जरिए निरंतर ऊर्जा पैदा करने में सक्षम हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस सफलता को भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक निर्णायक और क्रांतिकारी मोड़ करार दिया है।
जितना ईंधन खर्च करेगा, उससे कहीं ज्यादा बनाएगा
इस अत्याधुनिक रिएक्टर की सबसे बड़ी और अनोखी खूबी इसके ‘ब्रीडरÓ तकनीक में ही छिपी है। आम तौर पर सामान्य परमाणु रिएक्टर ईंधन (यूरेनियम) को जलाकर सिर्फ बिजली पैदा करते हैं, लेकिन कलपक्कम का यह रिएक्टर ऊर्जा पैदा करने के साथ-साथ नया ईंधन भी बनाता है। यह मशीन जितना ईंधन खर्च करती है, उससे कहीं ज्यादा मात्रा में नया ईंधन पैदा कर देती है। इस अभूतपूर्व स्वदेशी तकनीक के जरिए भारत के पास भविष्य के लिए परमाणु ईंधन का एक ऐसा अटूट भंडार तैयार हो जाएगा जो देश को हमेशा रोशन रखेगा।
डॉ. होमी भाभा का सपना साकार, दूसरे चरण में दमदार एंट्री
भारत का परमाणु कार्यक्रम मुख्य रूप से तीन चरणों (3 स्टेज प्रोग्राम) में बंटा हुआ है, जिसकी मजबूत नींव महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने रखी थी। पहला चरण उन सामान्य रिएक्टरों (क्क॥ङ्खक्र) का है, जो वर्तमान में देश के कई हिस्सों में संचालित हो रहे हैं। अब कलपक्कम के इस फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की शानदार सफलता के साथ ही भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम के दूसरे और सबसे अहम चरण में पूरे दमखम के साथ एंट्री मार ली है।
देश का बेशकीमती ‘थोरियम खजानाÓ बनेगा असली ताकत
परमाणु कार्यक्रम का तीसरा और अंतिम चरण थोरियम रिएक्टर का है। भारत के पास वर्तमान में यूरेनियम की काफी कमी है और हमें अपनी जरूरतों के लिए रूस, कजाकिस्तान या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, भारत के पास दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत थोरियम भंडार मौजूद है। पीएफबीआर (क्कस्नक्चक्र) ही वह इकलौता जरिया है जो भविष्य में इस विशाल थोरियम खजाने को बिजली में बदलने का चमत्कार करेगा। इसी तकनीक के दम पर भारत ने साल 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु क्षमता हासिल करने का जो विशाल लक्ष्य रखा है, वह अब आसानी से पूरा हो सकेगा।
रूस के बाद सिर्फ भारत का दबदबा, अमेरिका-जापान भी फेल
कलपक्कम रिएक्टर के चालू होने के बाद भारत दुनिया का महज दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसके पास अपना कॉमर्शियल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर मौजूद है। इस जटिल तकनीक में भारत ने अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे उन तमाम विकसित देशों को काफी पीछे छोड़ दिया है, जो इस पर काम कर रहे थे लेकिन अपने प्रोजेक्ट बीच में ही रोक बैठे। सबसे गर्व की बात यह है कि इस 500 मेगावाट क्षमता वाले रिएक्टर को ‘भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेडÓ (भाविनि) द्वारा पूरी तरह ‘मेड इन इंडियाÓ मुहिम के तहत डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसमें 200 से अधिक भारतीय छोटे उद्योगों का भी भारी योगदान है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत के ‘नेट जीरो 2070Ó लक्ष्य को पूरा करने और देश को सोलर या विंड एनर्जी से भी बेहतर, 24 घंटे निर्बाध बिजली देने में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
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