नई दिल्ली ,मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान, इजरायल तथा अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर साफ दिखने लगा है। खास तौर पर होर्मुज की खाड़ी, जो दुनिया के करीब 20त्न तेल और गैस परिवहन का मुख्य मार्ग है, इस समय संकट के केंद्र में है। ईरान की धमकी के बाद कई जहाज इस रास्ते पर रुक गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ है।
इस स्थिति का असर भारत पर भी पड़ सकता था, क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में गैस आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। हालांकि, भारत ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर ली।
भारत ने अमेरिका से रुक्कत्र आयात बढ़ाने का फैसला लिया, जिसके तहत टेक्सास से रवाना हुआ जहाज “क्क4&द्बह्य क्कद्बशठ्ठद्गद्गह्म्” रविवार को मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया। इसके अलावा 25 मार्च को “्रश्चशद्यद्यश ह्रष्द्गड्डठ्ठ” करीब 26,687 टन गैस लेकर पहुंचेगा, जो इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम के लिए होगी। वहीं 29 मार्च को एक और जहाज लगभग 30,000 टन गैस लेकर आएगा, जो ॥क्कष्टरु के लिए निर्धारित है।
होर्मुज मार्ग पर संकट के बावजूद भारत की इस रणनीति से घरेलू गैस आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल देश में रसोई गैस की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।