जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : यूजीसी अधिनियम को लागू किए जाने पर क्षेत्रीय पार्षदों ने रोष व्यक्त किया है। कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अधिनियम को वापस लिया जाना चाहिए।
इस संबंध में पार्षदों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। कहा कि पूरे देश में यूजीसी अधिनियम का विरोध चल रहा है। अधिनियम लागू हो जाने से उच्च शिक्षा व्यवस्था में असमानता व स्थानीय विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता की कमी से होने से विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जिससे तत्काल रूप से वापस लिए जाने की आवश्यकता है। पार्षदों ने यूजीसी अधिनियम को जनिविरोधी करार दिया। कहा कि अधिनियम लागू होने से विश्वविद्यालय के छात्रों में असमानता का भाव पैदा हो जाएगा, जिससे विश्वविद्यालय के स्वायत्तता में कमी आने से छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस अधिनियम के लागू हो जाने से खासकर पर्वतीय क्षेत्र के छात्रों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्र के छात्र पहले से संसाधनों की कमी से जूझ रहे है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस अधिनियम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इस मौके पर पार्षद सौरभ नौडियाल, विपिन डोबरियाल, रवींद्र रावत, प्रवेंद्र सिंह रावत, जयप्रकाश ध्यानी, रवींद्र रावत, नयन मोंगिया मौजूद रहे।