जंगली जानवरों की धमक रोकने के लिए बनाई गई थी सुरक्षा दीवार
क्षतिग्रस्त दीवार को लांघकर आबादी में प्रवेश कर रहे जंगली जानवर
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : आबादी में हाथी सहित अन्य जंगली जानवरों की धमक रोकने के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार केवल शोपीस बनकर रह गई है। जगह-जगह दीवार क्षतिग्रस्त होने के कारण जंगली जानवर आबादी में प्रवेश कर रहे हैं। आए दिन जंगल से सटे मार्गों पर हाथी की धमक देखी जाती है। ऐसे में मानव वन्य जीव संघर्ष का खतरा बना रहता है।
जंगली जानवरों की सबसे अधिक परेशानी सनेह क्षेत्र में बनी रहती है। दरअसल, वर्ष 2014-15 में सनेह क्षेत्र के रामपुर में हाथियों को रोकने के लिए करीब 1150 मीटर सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। उम्मीद थी कि सुरक्षा दीवार निर्माण के बाद हाथी आबादी में प्रवेश नहीं कर पाएंगे, लेकिन वर्तमान में यह हाथी सुरक्षा दीवार जगह-जगह से टूट चुकी है। ऐसे में आए दिन आबादी में हाथी की धमक बनी रहती है। हाथी आबादी क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान काश्तकारों को पहुंचाता है। बड़ी मेहनत से फसल उगाने के बाद अंत में हाथी उसे चट कर जाता है। यही स्थिति महाविद्यालय से घराट को जाने वाले मार्ग की भी बनी हुई है। यहां भी हाथी सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने से हाथी आसानी से आबादी में पहुंच जाता है। यही नहीं उक्त मार्ग पर गुलदार की भी धमक बनी रहती है। मार्ग पर जंगली जानवरों की चहलकदमी से मानव वन्य जीवन संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। क्षेत्रवासी महेंद्र कुमार, राजीव सिंह ने बताया कि देखरेख के अभाव में हाथी सुरक्षा दीवार जर्जर हो चुकी है। ऐसे में अब यह दीवार जानवरों को नहीं रोक पा रही है। सनेह क्षेत्र में जंगल के आसपास फेंसिंग लाइन भी बिछाई गई थी। लेकिन, वह भी पूरी तरह टूट चुकी है। कहा कि वन विभाग को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
स्ट्रीट लाइट तक नहीं
जंगल से सटे आबादी इलाकों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी रात के समय आवागमन करने वालों को होती है। सनेह वासियों ने जंगल से सटी सड़कों पर लाइट लगाने के लिए कुछ माह पूर्व वन विभाग व नगर निगम को पत्र भी दिया था। लेकिन, अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में रहागीरों के लिए जंगली जानवर कब मुसीबत बन जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता।