देहरादून(। कांग्रेस नेत्री गरिमा दसौनी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस जघन्य हत्याकांड में एक बेटी की जान गई, उस मामले में सरकार ने पीड़ित परिवार को ही प्रक्रिया से बाहर रखने का प्रयास किया है। मीडिया को जारी बयान में उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में सरकार की ओर से पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी की एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच के आदेश देना कहीं न कहीं पूरी जांच को भटकाने और असली मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि जब अंकिता के माता-पिता ने स्वयं मुख्यमंत्री को लिखित अर्जी दी है, तो फिर उनकी तहरीर के आधार पर सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई गई। क्या सरकार पीड़ित परिवार की आवाज से डर रही है। क्या सरकार उन ताकतों को बचाने की कोशिश कर रही है, जिनके नाम इस पूरे मामले में सामने आते रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सीबीआई जांच पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर दर्ज की जाए। जांच की हर प्रक्रिया में अंकिता के माता-पिता को पक्षकार बनाया जाए। जांच की निगरानी सिटिंग जज की देखरेख में हो।