अंकिता को न्याय दिलाए जाने की लड़ाई में सभी से एकजुट होने की अपील की

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जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर : उत्तराखण्ड महिला मंच की ओर से राष्ट्रीय स्तर के महिला संगठनों एवं बुद्धिजीवी महिलाओं के साथ मिलकर एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य रूप से अंकिता भण्डारी की हत्या और उसको लेकर पुलिस-प्रशासन के रवैए और जनता की भूमिका पर विचार विमर्श किया गया। इसके साथ ही हाल के दिनों में उत्तराखण्ड में हो रहे मानवाधिकार हनन के विभिन्न मामलों पर भी बातचीत की गई। बैठक में पीयूसीएल की कविता श्रीवास्तव ने अंकिता को न्याय दिलाए जाने की लड़ाई में सभी से एकजुट होने का आह्वान किया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य अंकिता की हत्या में शामिल अपराधियों को सजा दिलवाने के लिए क्या किया जाना चाहिए, इसकी सही जांच कैसे हो, इसके लिए क्या उपाय किये जाने चाहिए। साथ ही सरकार पर कैसे दबाव बने? अंकिता के परिवार वालों को उचित मुआवाजा और न्याय मिलने की बात भी बैठक में रखी गई। बैठक में आरंभ में श्रीनगर से छात्र संगठन आइसा की शिवानी पाण्डे जिस दिन 18 सितंबर को अंकिता के गायब होने से लेकर अब तक के सम्पूर्ण घटनाक्रम को सबके सामने रखा। उन्होंने कहा इस घटना के साक्ष्यों को प्रशासन द्वारा शुरू से ही छिपाया गया और उनको नष्ट करने की भरसक कोशिश की गई। जनवादी महिला समिति से सुभाषिनी अली, सीडब्ल्यूसी में प्रो. रही मैरी जान, उत्तराखंड हाईकोर्ट की एडवोकेट स्निग्धा तिवारी, देहरादून से दमयन्ती नेगी, उमा भट्ट, कविता कृष्णनन, एनएपीएम की मीरा संघमित्रा, गंगा असनोड़ा, बसन्ती पाठक, कविता श्रीवास्तव व श्रुति ने अपने विचार रखे।

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