देहरादून(। पुलिस के अनुसार, बीना शर्मा और विनोद उनियाल के संबंध करीब दो दशक पुराने हैं। शहीद पति की याद में मिली गैस एजेंसी की कमाई का एक बड़ा हिस्सा बीना शर्मा चुपचाप विनोद उनियाल के खाते में ट्रांसफर कर देती थीं। जब अर्जुन ने होश संभाला और एजेंसी का हिसाब अपने हाथ में लिया तब इस काली सच्चाई का खुलासा हुआ। यहीं से मां-बेटे और विनोद उनियाल के बीच दुश्मनी की नींव पड़ गई। 14 करोड़ की डील और ‘डबल’ का फंदा विवाद तब और गहरा गया जब विनोद के कहने पर बीना ने पिछले साल जीएमएस रोड की एक जमीन डॉ. अजय खन्ना को बेच दी। अर्जुन ने इस पर बैंक में आपत्ति लगा दी। क्योंकि, इस जमीन पर चार करोड़ का लोन बकाया था। तब बीना ने डॉ. खन्ना से 4 करोड़ लेकर लोन चुकाया और गुपचुप तरीके से 14 करोड़ में रजिस्ट्री कर दी। जमीन आठ करोड़ विनोद उनियाल को ट्रांसफर कर दिए। डील में रकम वीना शर्मा के खाते में खाते में आए। इसमें आठ करोड़ अगले ही दिन बिना ने विनोद उनियाल के खाते में ट्रांसफर कर दिए। एग्रीमेंट में शर्त थी कि यदि जमीन पर कब्जा नहीं मिला, तो बीना को डॉ. खन्ना को दोगुनी रकम लौटानी होगी। अर्जुन ने कोर्ट से स्टे ले लिया। जिससे कब्जा रुक गया और साजिशकर्ता चारों तरफ से फंस गए। एक महीने पहले हत्या की प्लानिंग, 20 दिन से रेकी एसएसपी ने बताया कि जब अर्जुन पर बीना ने दबाव बनाया कि वह स्टे हटा ले या जमीन की डील के शर्त के अनुसार वापस करने को रकम दे। अर्जुन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। तब एक महीने पहले तीनों ने उसे रास्ते से हटाने का फैसला किया। विनोद उनियाल ने इसके लिए अपने सबसे भरोसेमंद मोहरे ड्राइवर पंकज को चुना। पंकज ने करीब 20 दिनों तक अर्जुन की पल-पल की रेकी की। वह उसके घर तक गया और अंत में परेड ग्राउंड के पास टेनिस कोर्ट को हत्या के लिए चुना, क्योंकि वहां से भागना आसान था। विनोद से व्हाट्सएप पर संपर्क हत्या से कई दिन पहले पंकज से विनोद उनियाल ने फोन कॉल पर बात करना बंद कर दिया था। पंकज लगातार व्हाट्सएप के जरिए विनोद उनियाल के संपर्क में था। पुलिस को पंकज के मोबाइल से अर्जुन की कार की फोटो भी मिली है। ऐसे में पुलिस के लिए बड़ा सबूत शूटर पंकज का मोबाइल भी बना है। हत्या से पहले और बाद में पंकज और विनोद उनियाल के बीच हुई बातचीत के रिकॉर्ड पुलिस के हाथ लगे हैं।