आशा कार्यकत्रियों ने की 21 हजार मानदेय देने की मांग

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। आशा कार्यकत्रियों ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम 21 हजार रुपये का मानदेय देने सहित अन्य मांगों को लेकर 35वें दिन रविवार को तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने जल्द ही मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। गहरी नींद में सोई सरकार को जगाने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है। वेतन और सम्मान के लिए आशा कार्यकत्रियां संघर्ष कर रही हैं। कोरोना संकट के समय की गई सेवा को भुलाकर प्रदेश सरकार जानबूझकर आशाओं के आंदोलन को नजर अंदाज कर रही है, लेकिन उनकी लड़ाई मजबूत होती जा रही है।
रविवार को धरना स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार अनेक योजनाओं की घोषणा कर रही है, लेकिन आशाओं के आंदोलन की अनदेखी की जा रही है। आशाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। आशाओं को मात्र दो हजार रूपये मानदेय दिया जा रहा है। इतने कम वेतन में परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आशाओं का शोषण कर रही है। आशा कार्यकत्रियों ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 21 हजार रुपये का मानदेय देने, जब तक मानदेय और कर्मचारियों का दर्जा मिलने तक अन्य विभागों से योजनाओं में लगे कार्मिकों की तरह मानदेय देने, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन की सुविधा देने, कोविड कार्यों में लगी आशा कार्यकत्रियों को दस हजार रुपये मासिक भत्ता, 50 लाख रुपये का बीमा और दस लाख का स्वास्थ्य बीमा देने, कोविड ड्यूटी के दौरान मृत आशा कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख का बीमा और चार लाख का अनुग्रह राशि देने सहित 12 सूत्रीय मांगों को पूरा करने की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष प्रभा चौधरी, उपाध्यक्ष मीरा नेगी, सचिव रंजना कोटनाला, नीलम कुकरेती, प्रीति, कल्पना बिष्ट, रीना देवी, गोदाम्बरी, राखी, संजू नेगी, सीमा, अनीता घिल्डियाल, कमला, प्रमिला गुसांई, भागीरथी भंडारी, कांति भंडारी, पूनम, पुष्पा, कविता, सरोज जदली आदि शामिल थे।

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