जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : होली के त्योहार पर दमा (अस्थमा) और खांसी से संबंधित मरीजों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। दरअसल, होली के दौरान उड़ने वाला रंग, केमिकल युक्त गुलाल सांस संबंधी रोगियों के लिए हानिकारक होता है। यही नहीं, होली के कैमिकल युक्त रंग गर्भवती महिलाओं की भी परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को इससे दूरी बनानी चाहिए।
चार मार्च को मनाई जाने वाली होली को लेकर शहर में उत्साह बना हुआ है। शहरवासी एक-दूसरे पर रंग लगाने की तैयारियों में जुट गए हैं। लेकिन, होली का रंग दमा (अस्थमा) और खांसी के मरीजों के साथ ही गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो रंगों में मौजूद रसायन और धूल के कण सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं, जिससे दमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी, एलर्जी और सीने में जकड़न की समस्या बढ़ सकती है। खासकर बच्चों व बुजुर्गों को सावधान रहने की आवश्यकता है।
यह बरते सावधानी
1. केमिकल युक्त रंगों की बजाय हर्बल या प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें
2. चिकित्सक द्वारा दी गई दवाइयां और इनहेलर साथ रखें
3. धूल और अधिक भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें