इलैक्ट्रिक बसों के विरोध में ऑटो-विक्रम का चक्काजाम

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ऋषिकेश। ऋषिकेश में 25 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के विरोध में शनिवार को उत्तराखंड ऑटो-विक्रम महासंघ के सदस्य सड़क पर उतर पड़े। उन्होंने 1800 ऑटो-विक्रम का चक्काजाम कर रैली निकालकर नगर निगम कार्यालय का घेराव भी किया। मेयर शंभू पासवान के बसों के संचालन की इजाजत नहीं देने के आश्वासन पर महासंघ सदस्यों का आक्रोश शांत हुआ। शनिवार सुबह से ही उत्तराखंड ऑटो-विक्रम महासंघ के बैनर तले ऋषिकेश, नेपालीफार्म, मुनिकीरेती और तपोवन की ऑटो-विक्रम यूनियनें हड़ताल पर रहीं। यूनियनों के सवारी वाहन आईडीपीएल स्थित खाली मैदान में पहुंचे। यहां महासंघ अध्यक्ष महंत विनय सारस्वत के नेतृत्व में विरोध में प्रदर्शन किया गया। दोपहर में आईडीपीएल से जुलूस की शक्ल में यूनियन सदस्य वाहन लेकर मुख्य मार्ग से होते हुए देहरादून रोड फिर आशुतोष नगर तिराहे से यात्रा बस अड्डा मार्ग स्थित नगर निगम कार्यालय पहुंचे। कार्यालय का घेराव कर उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। महंत विनय सारस्वत ने कहा कि ऋषिकेश छोटा शहर है, जिसमें ऑटो-विक्रम के लिए पर्याप्त सवारियां ठीक से नहीं मिल पाती हैं। किसी तरह से इन वाहनों पर निर्भर लोगों का परिवार चल रहा है। अब सरकार इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कर इस आजीविका के साधन को भी छीनने का प्रयास कर रही है। उत्तराखंड परिवहन महासंघ अध्यक्ष सुधीर राय ने कहा कि ऋषिकेश में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा। इस फैसले का हरस्तर पर महासंघ विरोध करेगा। वहीं, आक्रोशित यूनियन सदस्यों को समझाने के लिए मेयर शंभू पासवान उनके बीच पहुंचे। बताया कि नगर निगम प्रशासन को इस योजना से कोई लेना-देना नहीं है। बावजूद, बसों के संचालन के लिए अनुमति मांगी जाती है, तो निगम इससे साफ इनकार कर देगा। महासंघ की ओर से यूनियन सदस्यों ने एक ज्ञापन भी मेयर को सौंपा। मौके पर त्रिलोक सिंह भंडारी, सुनील कुमार शर्मा, मंगल सिंह राणा, फेरू जगवानी, प्रवीण नौटियाल, वीरेंद्र सजवाण, राजेंद्र लांबा, मुकेश तिवाड़ी, नवीन चंद रमोला, राजेंद्र गुसाईं, दयाल सिंह भंडारी, आशुतोष शर्मा आदि मौजूद रहे।
ई-रिक्शा की हड़ताल से दूरी: शहर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के विरोध में ऑटो-विक्रम की हड़ताल से ई-रिक्शा चालकों ने दूरी बनाई, जिससे सवारी वाहन नहीं चलने से परेशान स्थानीय लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन सवारी वाहनों की कमी की भरपाई ई-रिक्शा नहीं कर पाए। कई ई-रिक्शा का मौका फायदे उठाते हुए ओवरलोडिंग भी करते दिखे। वहीं, ई-रिक्शा चालकों ने हड़ताल से दूरी में तर्क दिया कि ऑटो-विक्रम से संबंधित रूट उनका नहीं है। इलेक्ट्रिक बस के रूट पर भी उनके वाहन नहीं चलने हैं, जिसके चलते वह इस आंदोलन से दूर हैं। इन तर्कों की पुष्टि उत्तराखंड परिवहन महासंघ अध्यक्ष सुधीर राय ने की।
स्थानीय लोगों ने झेली फजीहत: इलेक्ट्रिक बसों के ऋषिकेश में संचालन के विरोध में शनिवार को ऑटो-विक्रम की हड़ताल से स्थानीय लोगों को खासी फजीहत झेलनी पड़ी। रोजमर्रा के काम के लिए ग्रामीण क्षेत्र से शहर जाने के लिए निकले लोगों को सवारी वाहन ही नहीं मिल पाए। रोडवेज की बसें पहुंची, तो उनमें भी सीट के लिए गांवों में नेशनल हाईवे पर मारामारी जैसे हालात दिखे। नगर क्षेत्र के चौक-चौराहों पर भी सवारी वाहनों के इंतजार में यात्री घंटों खड़े दिखे। कई लोगों ने मजबूरन दोपहिया और अन्य वाहनों से लिफ्ट मांगकर गतंव्य का रुख किया।

 

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