नईदिल्ली, भारतीय शटल आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है. वो टूर्नामेंट के मेंस सिंगल में फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे और 1965 के बाद यहां तक पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. 1965 में दिनेश खन्ना ने टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने थे.
शनिवार को निंगबो ओलंपिक स्पोर्ट्स सेंटर में पुरुषों के सिंगल्स सेमीफाइनल में आयुष ने वर्ल्ड नंबर – 1 और पेरिस 2024 के सिल्वर मेडलिस्ट कुनलावुत विटिडसर्न को हराकर चौंका दिया. वर्ल्ड में 25वीं रैंक वाले इस भारतीय खिलाड़ी ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया और पहला सेट 10-21 से हारने के बाद लगातार दो सेट 21-19, 21-17 से जीतकर फाइनल में जगह बना ली. यह मैच एक घंटा 15 मिनट तक चला.
यह जीत आयुष के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि वह 2018 में एच.एस. प्रणॉय के बाद बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष सिंगल्स खिलाड़ी बन गए हैं. इसने इस टूर्नामेंट में भारत के पोडियम पर पहुंचने के इंतजार को भी खत्म कर दिया. इससे पहले आखिरी मेडल 2023 में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की डबल्स टीम ने जीता था.
फाइनल तक का आयुष का सफर काफी शानदार रहा है. उन्होंने क्वार्टर फाइनल में ही सुर्खियां बटोरी थीं, जब उन्होंने वर्ल्ड नंबर 4 जोनाथन क्रिस्टी को 23-21, 21-17 से हराया था. यह इस इंडोनेशियाई स्टार के खिलाफ उनकी पहली जीत थी. टूर्नामेंट में इससे पहले, उन्होंने वर्ल्ड नंबर 7 ली शी फेंग को सीधे गेम में हराया था और उसके बाद चीनी ताइपे के चिन यू जेन पर भी एक और मजबूत जीत हासिल की थी.
खास बात ये है कि इस टूर्नामेंट में दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पी.वी. सिंधु दूसरे राउंड में हार गईं, जबकि लक्ष्य सेन पहले ही राउंड में हारकर बाहर हो गए, जिनसे भारत को काफी ज्यादा उम्मीदें थी. आयुष शेट्टी अब एक बड़ी उपलब्धि की दहलीज पर खड़े हैं. वे भारत की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर उठाए हुए हैं और अपने करियर के सबसे बड़े खिताब के साथ अपने इस शानदार सफर को अंजाम तक पहुंचाने का लक्ष्य रखे हुए हैं.