मुंबई , बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के दोषी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 12 साल कर दिया है। अदालत ने यह नरमी दोषी की कम उम्र, लंबे समय तक जेल में बिताए गए वक्त और वहां उसके आचरण में आए सुधार को देखते हुए बरती है। खास बात यह है कि दोषी ने जेल में रहते हुए महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित निबंध प्रतियोगिता और अध्ययन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जिसे कोर्ट ने उसके सुधरने का एक सकारात्मक संकेत माना है।
क्कह्रष्टस्ह्र कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की खंडपीठ ने 2 फरवरी को दिए अपने आदेश में साल 2016 में हुए इस अपराध के लिए दोषी की सजा को बरकरार तो रखा, लेकिन उसकी अवधि को कम कर दिया। दोषी ने विशेष पॉक्सो (क्कह्रष्टस्ह्र) अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि अपराध के वक्त दोषी की उम्र महज 20 साल थी और उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था। वह दिसंबर 2016 से लगातार हिरासत में है और यहां तक कि कोरोना महामारी के दौरान भी उसे पैरोल या रिहाई नहीं मिली थी।
जेल में गांधीवादी विचारों का किया अध्ययन
सुनवाई के दौरान बेंच ने जेल में दोषी द्वारा की गई पढ़ाई-लिखाई और अन्य गतिविधियों के प्रमाण पत्रों पर गौर किया। इसमें महात्मा गांधी के विचारों और साहित्य पर आधारित एक परीक्षा और निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने का प्रमाण पत्र भी शामिल था। कोर्ट ने माना कि दोषी सुधार की राह पर है। अपराध की गंभीरता और इन सुधारात्मक पहलुओं को संतुलित करते हुए बेंच ने टिप्पणी की कि न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए 12 साल की सजा पर्याप्त होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी द्वारा जेल में अब तक बिताया गया समय इस 12 साल की सजा में समायोजित कर लिया जाएगा।