हरिद्वार()। श्री पंचदसनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और तुलसी मानस मंदिर भूपतवाला के पीठाधीश्वर स्वामी अर्जुन पुरी के ब्रह्मलीन होने से संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। सोमवार को विधि-विधान के साथ उनको तुलसी मानस मंदिर परिसर में भू-समाधि दी गई। स्वामी अर्जुन पुरी का निधन रविवार को हुआ था। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ तुलसी मानस मंदिर परिसर में रखा गया, जहां दिनभर संतों और भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह उनकी अंतिम शोभायात्रा निकाली गई, जो भूपतवाला क्षेत्र से होते हुए वापस आश्रम परिसर पहुंची। इसके बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महामंडलेश्वर को भू-समाधि दी गई। इस अवसर पर जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, जयराम आश्रम के पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि, पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत रामरतन गिरि, निर्मल पंचायती अखाड़ा के कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री, श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा के कोठारी महंत राघवेंद्र दास, महंत गोविंद दास, महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद, महामंडलेश्वर रुपेंद्र प्रकाश, राजीव भट्ट, बागेश्वर पांडे, पार्षद आकाश भाटी, अनिल मिश्रा मौजूद रहे। धर्म और साधना को समर्पित किया जीवन इस दौरान साधु-संतों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पमालाएं अर्पित करते हुए भावभीनी विदाई दी। संतों ने कहा कि स्वामी अर्जुन पुरी का पूरा जीवन धर्म, तप और साधना को समर्पित रहा। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज और श्रद्धालुओं को अपूरणीय क्षति पहुंची है। श्रद्धालुओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया।