वाशिंगटन , अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और कानूनी झटका लगा है। टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद अब एक फेडरल कोर्ट ने उनकी ‘थर्ड कंट्रीÓ डिपोर्टेशन नीति को भी गैरकानूनी करार देते हुए रद्द करने का आदेश दिया है। यह फैसला बुधवार को सुनाया गया। फेडरल जज के इस फैसले से ट्रंप प्रशासन में हलचल मच गई है। मामला पहले ही देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है और अब अंतिम निर्णय स्ह्वश्चह्म्द्गद्वद्ग ष्टशह्वह्म्ह्ल शद्घ ह्लद्धद्ग ठ्ठद्बह्लद्गस्र स्ह्लड्डह्लद्गह्य द्वारा किया जाएगा।
मैसाचुसेट्स के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज क्चह्म्द्बड्डठ्ठ श्व. रूह्वह्म्श्चद्ध4 ने अपने आदेश पर 15 दिनों की रोक लगाने पर सहमति दी है, ताकि सरकार को अपील करने का समय मिल सके। जज ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया था, जिससे उनके पूर्व आदेश पर रोक लग गई थी और युद्धग्रस्त दक्षिण सूडान भेजी जा रही एक उड़ान को अनुमति मिल गई थी।
जज मर्फी ने कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (ष्ठ॥स्) की नीति के तहत प्रवासियों को किसी तीसरे देश में भेजने से पहले अर्थपूर्ण नोटिस और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि मौजूदा नीति वैध कानूनी चुनौतियों को समाप्त कर देती है, क्योंकि निर्वासन की प्रक्रिया आपत्ति दर्ज करने से पहले ही लागू कर दी जाती है।
उन्होंने कहा, ये हमारे कानून हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्म लेने की सौभाग्यशाली स्थिति के प्रति कृतज्ञता के साथ यह अदालत इस मूल सिद्धांत की पुष्टि करती है कि किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना जीवन, स्वतंत्रता या संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
जज मर्फी ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन ने कई बार उनके आदेशों का उल्लंघन किया है या करने की कोशिश की है। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले मार्च में कम से कम छह लोगों को, जिन्हें अस्थायी रोक आदेश के तहत संरक्षण मिलना चाहिए था, अल सल्वाडोर और मैक्सिको भेज दिया गया। डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति छ्वशद्ग क्चद्बस्रद्गठ्ठ द्वारा नामित जज मर्फी ने कहा कि डीएचएस की थर्ड कंट्री निर्वासन नीति उन प्रवासियों को निशाना बनाती है, जिन्हें उनके मूल देश में संभावित यातना या उत्पीड़न के खतरे के कारण सुरक्षा प्रदान की गई थी।
इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ढ्ढष्टश्व) अधिकारियों के अनुसार, मई में दक्षिण सूडान भेजे गए आठ लोगों को अमेरिका में अपराधों के लिए दोषी ठहराया जा चुका था और उनके खिलाफ अंतिम निर्वासन आदेश जारी थे। अब इस संवेदनशील मामले पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जाएगा, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।