नई दिल्ली , प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन के मामलों में तेजी लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने मौजूदा वित्त वर्ष में 500 चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही, जांच अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि केस दर्ज होने के बाद जांच को एक से दो साल के अंदर पूरा कर लिया जाए। हालांकि, बहुत पेचीदा मामलों में इसमें छूट मिल सकती है।
यह फैसला पिछले साल 19 से 21 दिसंबर के बीच असम के गुवाहाटी में हुई जोनल अधिकारियों की 34वीं तिमाही बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता ईडी डायरेक्टर राहुल नवीन ने की। एजेंसी अब दिल्ली से बाहर हर तीन महीने में ऐसी बैठकें कर रही है। इससे पहले केवड़िया (गुजरात) और श्रीनगर में बैठकें हुई थीं। गुवाहाटी में सम्मेलन आयोजित करना पूर्वोत्तर क्षेत्र की रणनीतिक और परिचालन अहमियत को भी दर्शाता है।
बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि पुराने लंबित मामलों को खत्म करने और नई जांच को समय पर पूरा करने के लिए यह लक्ष्य जरूरी है। उन्हें निर्देश दिया गया कि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए, समय पर अभियोजन शिकायत दाखिल हों और कुर्की या जुर्माने जैसी कार्रवाई कानूनी रूप से ठोस हो। पीएमएलए कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल सावधानी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ करने, समन और कानूनी नोटिस केवल स्पष्ट आवश्यकता और उचित आधार पर जारी करने पर जोर दिया गया।
बैठक में कई प्राथमिकता वाले मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें विदेशों में छिपी अवैध संपत्ति का पता लगाना, गलत इस्तेमाल हो रहे ट्रेड चैनलों की पहचान करना, व्यापार के जरिए धन शोधन और दिवालियापन कानून (आईबीसी) के दुरुपयोग को रोकना शामिल है। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड, अवैध सट्टेबाजी, ऑनलाइन गेमिंग और शेयर बाजार में हेराफेरी जैसे मामलों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। विदेशी फंडिंग के उन रास्तों पर भी नजर रखने को कहा गया जिनका इस्तेमाल अस्थिरता फैलाने या देश विरोधी गतिविधियों के लिए हो सकता है
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