उत्तराखंड

नगर निगम की जमीन बेचने की डील कर भाजपा पार्षद दंपति ने सवा करोड़ हड़पे

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देहरादून। भाजपा की निवर्तमान पार्षद नीतू वाल्मीकि और उसके पति राकेश उर्फ तिनका ने नगर निगम की जमीन बिकाऊ बताकर 1.31 करोड़ रुपये ठग लिए। रकम पटवारी, तहसीलदार, मुख्य सचिव कार्यालय में जमा कराने, स्टाम्प शुल्क, दाखिल खारिज, सेल डीड पंजीकरण आदि के नाम पर ली गई। एसएसपी कार्यालय दी गई तहरीर पर दंपति के खिलाफ रायपुर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। एसएसपी अजय सिंह को असलम खान निवासी बलबीर रोड ने शिकायत दी। कहा कि उनका संपर्क जुलाई 2022 में राकेश तिनका और उसकी पत्नी नीतू वाल्मीकि ( निवर्तमान पार्षद तरला आमवाला) से हुआ। राकेश तिनका ने खुद को भाजपा के वरिष्ठ नेता के रूप में प्रस्तुत किया। दंपति ने ऊंची राजनैतिक पहुंच का हवाला देते हुए प्रस्ताव दिया कि नगर निगम की कुछ भूमि बिकाऊ है। यह जमीन खरीदवाने और मुनाफे में आधा हिस्से लेन का झांसा दिया। सरकार से अनुमति दिलाकर जमीन की रजिस्ट्री की जिम्मेदारी आरोपी दंपति ने ली। दंपति की बातों में आकर पीड़ित जमीन खरीदने को तैयार हो गए। उन्होंने निवेश के लिए परिचित शुभम काला और शादाब खान को शामिल किया। आरोपियों ने जुलाई 2022 में आईटी पार्क से पहले सहस्रधारा रोड पर एक जमीन दिखाई। उसके खरीदारी के दस्तावेज बनाए। उन पर पीड़ितों से हस्ताक्षर कराए गए। आरोप है कि इसके बाद नगर निगम में जमा कराने के नाम पर 24 जुलाई 2022 को 19 लाख, पटवारी, तहसीलदार और मुख्य सचिव कार्यालय में देने नाम पर 26 जुलाई 2022 को 15 लाख रुपये, 31 जुलाई 2022 को पंचायत क्लीयरेंस के नाम पर पांच लाख रुपये, दो अगस्त 2022 को नगर निगम में जमा कराने के नाम पर 15 लाख रुपये, 10 अगस्त 2022 को दाखिल खारिज के नाम पर 10.50 लाख रुपये, 20 अगस्त 2022 को सेल डीड के पंजीकरण के नाम पर 3.50 लाख रुपये लिए गए। यह काम जल्द पूरा होने का झांसा दिया। इस प्रक्रिया के बीच राकेश तिनका और उसकी पत्नी नीतू ने असलम और शुभम काला को नगर निगम की एक जमीन सहस्रधारा रोड पर टचवुड स्कूल के पास दिखाई। उसकी विभिन्न अनुमति और खरीदारी के नाम के नाम पर पहले की तरह लाखों रुपये लिए गए। आरोप है कि 20 सितंबर 2022 को पीड़ित को सचिवालय गेट पर बुलाया। वहां गार्ड रूम में एक बुकलेट पर हस्ताक्षर कराए और साढ़े पांच लाख रुपये अंदर अफसरों को देने के नाम पर ले लिए। आरोप है कि दंपति ने इस तरह जाल बिछाया कि पीड़ित चालबाजी समझ नहीं पाए। 1.31 करोड़ रुपये देने के बाद पता लगा कि नगर निगम की कोई जमीन बिकाऊ नहीं थी। आरोपी दंपति ने फर्जी दस्तावेज बनाकर उनके जरिए यह ठगी की। ऐसी कोई पत्रावली शासन या नगर निगम चली ही नहीं। एसओ रायपुर प्रदीप नेगी ने बताया कि मामले में एसएसपी के निर्देश पर आरोपी दंपति के खिलाफ फर्जीवाड़े से रकम हड़पने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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