हरिद्वार()। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने के साथ ही उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है। इसी कड़ी में हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में राम नाम कीर्तन के जरिये विरोध दर्ज कराया गया। सोमवार को शंकराचार्य के शिष्यों ने सामूहिक राम नाम जप किया और प्रयागराज प्रशासन पर बर्बरता का आरोप लगाया। उन्होंने एक स्वर में मांग उठाई कि प्रयागराज प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। चेताया कि ऐसा न होने पर खून से पत्र लिखकर प्रयागराज कूच किया जाएगा। भगवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि शंकराचार्य गंगा स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने जबरन रोक लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके शिष्यों के साथ मारपीट की गई और 85 वर्षीय संत तक को नहीं बख्शा गया। पंडित विष्णुदास ने कहा कि संत के साथ इस तरह का कृत्य सरकार को शोभा नहीं देता। गंगा स्नान से रोकने का तरीका निंदनीय है। इस दौरान संजय शास्त्री, पंडित धीरेंद्र शास्त्री, यशपाल शर्मा, पंडित सचिदानंद पैन्यूली, दीपक गौनियाल, मनोज मिश्रा, पंडित रोहित नौटियाल, कमलेश पांडे और आचार्य नितिन शास्त्री सहित कई लोग मौजूद रहे। खून से पत्र लिख राष्ट्रपति को भेजेंगे संत श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रयागराज का घटनाक्रम संत समाज के सम्मान पर सीधा हमला है। उन्होंने सभी धार्मिक संगठनों से एकजुट होकर शंकराचार्य के समर्थन में आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मंगलवार को विरोध स्वरूप खून से पत्र लिखकर राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।