जोधपुर , राजस्थान के जोधपुर नगर निगम में एक ऐसा वाकया हुआ जिसे सुनकर हर कोई अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा है। यहां प्रशासन ने एक रहस्यमयी तिजोरी को खोलने के लिए भारी मशक्कत की, मैकेनिक बुलाए और हजारों रुपये खर्च कर दिए। सबको उम्मीद थी कि अंदर कोई खजाना या अहम दस्तावेज होंगे, लेकिन जब दरवाजा खुला तो ‘खोदा पहाड़ निकली चुहियाÓ वाली कहावत सच साबित हुई। तिजोरी के अंदर से महज एक रुपये का सिक्का निकला।
20 साल से बंद थी रहस्यमयी तिजोरी
निगम के पुराने कार्यालय में इन दिनों सफाई और पुराने रिकॉर्ड के सत्यापन का काम चल रहा है। इसी दौरान अधिकारियों की नजर कोने में पड़ी एक धूल खा रही भारी-भरकम तिजोरी पर पड़ी। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि यह तिजोरी साल 2005 के आसपास यहां लाई गई थी, लेकिन समय के साथ इसकी चाबियां गुम हो गईं और पिछले दो दशकों से यह एक रहस्य बनी हुई थी। अधिकारियों को लगा कि शायद इसमें पुराने जमाने की बेशकीमती फाइलें, जमीन के पट्टे या हो सकता है कुछ नकदी सुरक्षित रखी हो। इसी जिज्ञासा में इसे तत्काल खोलने का फैसला लिया गया।
ताला तोड़ने में खर्च हो गए 2500 रुपये
तिजोरी इतनी पुरानी और मजबूत थी कि इसे आसानी से खोलना मुमकिन नहीं था। इसके लिए बाहर से एक विशेषज्ञ कारीगर को बुलाया गया। घंटों की मशक्कत और विशेष उपकरणों के इस्तेमाल के बाद तिजोरी का लॉक तोड़ा जा सका। इस पूरी कवायद में निगम को कारीगर की फीस और अन्य खर्च मिलाकर करीब 2,500 रुपये चुकाने पड़े। अधिकारियों और कर्मचारियों की सांसें थमी हुई थीं और वे पलकें बिछाए इंतजार कर रहे थे कि अब भीतर से क्या निकलेगा।
दरवाजा खुला तो उड़ गए होश
काफी जद्दोजहद के बाद जैसे ही तिजोरी का भारी-भरकम दरवाजा खुला, वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। अंदर न तो सोने-चांदी के सिक्के थे और न ही कोई खुफिया दस्तावेज। तिजोरी के गहरे अंधेरे में पड़ा था सिर्फ 1982 का एक रुपये का सिक्का। यह नजारा देखते ही वहां सन्नाटा खिंच गया और फिर ठहाके गूंजने लगे। जिस तिजोरी को खोलने के लिए ढाई हजार रुपये स्वाहा कर दिए गए, उसकी कुल जमा पूंजी सिर्फ एक रुपया निकली।