हल्द्वानी()। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को हल्द्वानी के व्यापारिक जगत ने विकासोन्मुख तो माना है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उम्मीदें पूरी न होने से कुछ मायूसी भी है। लोगों ने कहा कि जहां कैंसर दवाओं और बुनियादी ढांचे पर निवेश का स्वागत हुआ, वहीं पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखने और उत्तराखंड के लिए विशेष पैकेज न मिलने पर सवाल भी उठे।
*बजट में सर्वांगीण विकास और आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए कई बातें है साथ ही आयकर नियमों में सरलीकरण के नियमों को 1 अप्रैल से लागू करने की बात रखी गई। बजट को विकसित भारत को दृष्टिगत रखते हुए बनाया गया है। – नवीन वर्मा, वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद, उपाध्यक्ष
*बजट में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में न लाने से ट्रांसपोर्टरों में मायूसी है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों के कलपुर्जे सस्ते करने का निर्णय स्वागत योग्य है। उम्मीद थी कि ईंधन की कीमतों में राहत मिलेगी, जिससे परिवहन लागत कम हो पाती। – हरजीत सिंह चड्ढा, प्रवक्ता ट्रांसपोर्ट महासंघ
*बजट विकसित भारत की दिशा में सकारात्मक है, जिसमें कैंसर दवाओं पर राहत और रेल कॉरिडोर की घोषणाएं स्वागत योग्य हैं। हालांकि, रेल सुरक्षा, होम लोन पर ब्याज राहत और व्यापारियों हेतु जीएसटी सरलीकरण जैसे मुद्दों पर सरकार को और ध्यान देने की आवश्यकता है। – डॉ़ प्रमोद अग्रवाल गोल्डी, प्रदेश जीएसटी प्रभारी व्यापार मण्डल *यह बजट लोकलुभावन के बजाय विकासोन्मुख है। हालांकि यह मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरा, फिर भी देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक प्रभावी और दूरगामी सोच वाला बजट साबित होगा। – बिक्रम सिंह पोखरिया
*ट्रांसपोर्टरों के लिए बजट निराशाजनक रहा। हमें उम्मीद थी कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में आने की उम्मीद थी। हालांकि सीएनजी सस्ती हुई है, लेकिन ट्रांसपोर्टर के लिए यह अपर्याप्त और विशेष राहत रहित नहीं हैं। – प्रदीप सब्बरवाल, ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी, अध्यक्ष
*उत्तराखंड आपदा ग्रस्त प्रदेश है यहां प्राकृतिक रूप से चुनौतियां से लोग जूझते है। उत्तराखंड को एक विशेष पैकेज की घोषणा की आवश्यकता थी जिससे यहां के पर्वतीय जिलों पर विकास हो सके जिससे रोजगार व पर्यटन को बढ़ावा मिलता। – ललित कर्नाटक, वरिष्ठ अधिवक्ता