नई दिल्ली , कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सोमवार को राज्यसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर तीखा हमला बोलते हुए इसे भुला देने लायक और जल्द ही लोगों की यादों से गायब होने वाला बताया। उन्होंने कहा कि देश में युवाओं में बेरोज़गारी की दर 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और 25 प्रतिशत से भी कम कार्यबल को नियमित रोजगार मिल पा रहा है। बजट पर चर्चा के दौरान चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या सरकार और उसके प्रमुख मंत्री 700 से अधिक पन्नों वाले आर्थिक सर्वेक्षण को पढ़ते भी हैं या फिर उसकी कड़वी सच्चाइयों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण में चिन्हित तीन बड़ी चुनौतियों पूंजी निवेश, बेरोज़गारी और धीमी आर्थिक वृद्धि का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों से निपटने में पूरी तरह विफल रही है।
चिदंबरम ने कहा कि सकल स्थिर पूंजी निर्माण जीडीपी के 30 प्रतिशत पर अटका हुआ है, जबकि 2024-25 में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) घटकर 0.09 प्रतिशत से भी कम रह गया है। उन्होंने कहा कि कंपनियों के पास पर्याप्त नकदी होने के बावजूद निजी निवेश 22 प्रतिशत के आसपास ही बना हुआ है।
उन्होंने 2025-26 में पूंजीगत व्यय में 0.44 लाख करोड़ रुपये की कटौती पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। उनके मुताबिक सार्वजनिक, निजी और विदेशी तीनों क्षेत्रों से निवेश के कोई ठोस संकेत नहीं मिल रहे हैं।