लाशों से पटी चीन की सड़कें, अगले 40 दिन में 200 करोड़ लोग करेंगे यात्रा, और बिगड़ सकती है स्थिति

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बीजिंग, एजेंसी। चीन में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर है। यहां की आबादी का एक बड़ा हिस्सा संक्रमित हो चुका है। अस्पतालों में बेड और डक्टरों की भारी कमी है। चीन भले ही अपने यहां के आंकड़ों को टुपा रहा हो, लेकिन दुनिया वहां पर कोरोना का कोहराम देख रही है, लेकिन ताजा हालातों को देखकर कहा जा सकता है कि चीन में हालात और बिगड़ने वाले हैं।
दरअसल, शनिवार से चीन का श्लूना न्यू ईयरश् शुरू हो चुका है। इसे 40 दिन का दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन कहा जाता है। दरअसल, यहां इस अवधि में बड़ी संख्या में लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। 21 जनवरी से इसको लेकर आधिकारी टुट्टियां शुरू हो रही हैं। 2020 के बाद ऐसा पहली बार है कि चीन में बिना यात्रा प्रतिबंधों के लूना न्यू ईयर मनाया जाएगा। बता दें, 2020 से चीन में लागू जीरो कोविड पलिसी को खत्म कर दिया गया था और लोगों पर से प्रतिबंध भी हटा लिए गए थे। साथ ही चीन ने कोरोना संक्रमण के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए अपनी सीमाएं भी खोल दी है।
चीन के परिवहन मंत्रालय के एक अनुमान के मुताबिक, अगले 40 दिनों में 200 करोड़ से अधिक लोगों के यात्रा करने का अनुमान है। बता दें, चीन में इस तरह की यात्राएं आमतौर पर नए साल के दिन से 15 दिन पहले शुरू होती हैं और लगभग 40 दिनों तक चलती हैं। ऐसे में संक्रमण और अधिक बढ़ने की आशंका है।
चीन के वर्तमान हालात इतने खराब हैं कि यहां सरकार लोगों के अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। ट्विटर पर शेयर किए जा रहे वीडियो में सड़कों पर अस्थायी दाह संस्कार दिख रहे हैं। एक सड़क पर एक शव के चारों ओर लोग दिख रहे हैं, जिसके बाद उसमें आग लगा दी जाती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में अंतिम संस्कार के लिए काफी लंबी लाइनें हैं। लोगों को बस दस मिनट का ही समय दिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यहां के अंतिम संस्कार स्थलों पर सामान्य से पांच गुना शव पहुंच रहे हैं।
चीनी सरकार ने शनिवार को कोरोनो वायरस से संबंधित घटनाओं के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का आदेश दिया है। बता दें, चीन रविवार को 12 बजे से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए प्रतिबंध को समाप्त कर देगा। इससे एक दिन पहले कोरोना बंदियों को रिहा करने का आदेश जारी किया गया है।
बीजिंग के चेन नामक व्यक्ति की मानें तो चीन में कोविड के इलाज का बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि पिछले माह उनके 85 साल के पिता कोविड संक्रमित हुए तो उन्हें न एंबुलेंस मिली न डक्टर। जैसे तैसे उन्हें चायोयांग अस्पताल लेकर गए तो कहा गया कि वे या तो दूसरे अस्पताल जाएं या पिता को गलियारे में आईवी ड्रिप लगवाकर बैठ जाएं। वहां न बेड मिले, न श्वसन में सहायक मशीन और न अन्य मेडिकल उपकरण। हालांकि, विशेष संपर्कों के जरिए उनके पिता को दूसरे अस्पताल में जगह मिल गई, लेकिन तब तक उन्हें फेफड़े में गंभीर संक्रमण फैल चुका था, वह जैसे तैसे बचे हैं।

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