देहरादून। शैल कला एवं ग्रामीण विकास समिति के तत्वावधान में चिपको आंदोलन की वर्षगांठ पर शनिवार को एक बैठक संगठन के सहस्त्रधारा रोड स्थित एकता विहार कार्यालय में हुई। चिपको आंदोलन को याद करते हुए समिति के संस्थापक स्वामी एस चंद्रा ने कहा कि चिपको आंदोलन हमें केवल इतिहास ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी चेतावनी देती है। चिपको केवल पेड़ों से चिपकने का आंदोलन नहीं था, यह प्रकृति से जुड़ने का दर्शन था। चिपको आंदोलन’ ने ही प्रकृति से हमारा साक्षात्कार कराया। जहां चिपको आंदोलन की प्रेरणाश्रोत गौरा देवी और ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित किया कि जंगल केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन, मिट्टी, पानी और हवा का आधार है। चंडी प्रसाद भट्ट और सुन्दर लाल बहुगुणा ने इस चेतना को जन-जन तक पहुंचाकर इसे वैश्विक आंदोलन बना दिया। इस मौके पर गति संस्था के नीरज उनियाल, आनन्द स्वरूप, अभ्यंश चंद्रा, अंशुल घई, अंशुल चौधरी उपस्थित रहे I