नई दिल्ली ,31 दिसंबर (आरएनएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश (ष्टछ्वढ्ढ) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर अहम फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लीगल इमरजेंसी की स्थिति में कोई भी नागरिक किसी भी समय, यहां तक कि आधी रात को भी, अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
ष्टछ्वढ्ढ सूर्यकांत के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को जांच एजेंसियों द्वारा गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है और उसके मौलिक अधिकारों पर तत्काल खतरा हो, तो अदालतें समय की बाध्यता से परे जाकर सुनवाई कर सकती हैं। उन्होंने कहा, मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट हमेशा जनता के लिए उपलब्ध रहें। नियमित कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी लीगल इमरजेंसी में व्यक्ति को न्याय मिल सके।
लंबित मामलों के निपटारे के लिए संवैधानिक पीठों पर जोर
ष्टछ्वढ्ढ सूर्यकांत ने माना कि अदालतों में बड़ी संख्या में याचिकाएं लंबित हैं। इनके शीघ्र निपटारे के लिए अधिक से अधिक संवैधानिक पीठों के गठन की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि लंबित मामलों में स्ढ्ढक्र (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े विवाद भी शामिल हैं। बिहार के बाद देश के 11 राज्यों में स्ढ्ढक्र प्रक्रिया चल रही है, जिसे अदालत में चुनौती दी गई है।
सबरीमाला मामले में 9 सदस्यीय पीठ पर विचार
ष्टछ्वढ्ढ सूर्यकांत ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भी याचिका दाखिल है। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और महिला अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा है, जिसके लिए नौ सदस्यीय संविधान पीठ के गठन पर विचार किया जा रहा है।
वकीलों के लिए सख्त समयसीमा
मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मामलों में लंबे समय तक चलने वाली बहस की अनुमति नहीं दी जाएगी। अब सुप्रीम कोर्ट में वकीलों को निर्धारित समयसीमा के भीतर ही मौखिक दलीलें पूरी करनी होंगी और इसका कड़ाई से पालन कराया जाएगा।