स्वच्छता पर ग्रहण, खाली प्लाट व नालों में डाल रहे गंदगी

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शहर में कुछ लोग खाली प्लाट व नदी नालों में डाल रहे गंदगी
गंदगी के ढेर लगने से स्वच्छता अभियान पर लग रहा पलीता
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : नगर निगम शहर को स्वच्छ व स्वस्थ बनाने के प्रयास कर रहा है। लेकिन, कुछ लोग निगम के इस अभियान को पलीता लगा रहे हैं। हालत यह है कि घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए वाहनों के संचालन के बाद भी लोग खाली प्लाट व नदी-नालों में कूड़े का ढेर लगा रहे हैं। इससे जहां स्वच्छता पर ग्रहण लग रहा है वहीं, संक्रामक बीमारियों का भी खतरा भी बढ़ता जा रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण लिस्ट में कोटद्वार शहर बेहतर रैंक हासिल करे इसके लिए शहरवासियों का स्वच्छता के प्रति जागरूक होना आवश्यक है।
कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के चालीस वार्डों में करीब 45 हजार भवन हैं। जिसमें करीब डेढ़ लाख की आबादी रहती है। प्रत्येक घर से कूड़ा एकत्रित करने के लिए नगर निगम वाहनों का संचालन कर रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए घरों से माह में मात्र तीस रुपये वसूले जाते हैं। लेकिन, कई लोग तीस रुपये का भुगतान करने से बचने के लिए शहर की सूरत बिगाड़ रहे हैं। घरों से निकलने वाले कूड़े को रात के अंधेरे में खाली प्लाट व नदी नालों के किनारे फेंका जा रहा है। तीन किलोमीटर हिस्से में नगर क्षेत्र के बीच से गुजरने वाले पनियाली गदेरे को भी लोगों ने कूड़ा डंपिग जोन बना दिया है। मोटर नगर में अधुनिक बस अड्डे के लिए चिह्रित स्थान पर भी कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। दुर्गंध के कारण राहगीरों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग मरे हुए जानवरों को भी इस गड्ढे में फेंक देते हैं। जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। कई घरों के आसपास खाली प्लाट में भी यही स्थिति बनी हुई है। ऐसी स्थिति में यदि आमजन ने यह लापरवाही नहीं छोड़ी तो शहर की स्थिति बिगड़नी तय है। जबकि, नगर निगम भी समय-समय पर आमजन को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता रहता है। कुछ माह पूर्व ही निगम के अधिकारियों ने वार्डों में पहुंचकर लोगों को घर का कूड़ा निगम के वाहन में ही डालने की अपील की थी।

निगम के पास संसाधनों की कमी
वर्ष-2018 में कोटद्वार नगर निगम का गठन किया गया था। चालीस वार्डों में कूड़ा सहित अन्य व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए निगम पिछले आठ वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है। बावजूद अब भी निगम के पास सफाई कर्मियों सहित अन्य संसाधनों की कमी है। वाहन चालकों के 41 पद सृजित हैं जिन्हें आउसोर्स, संविदा, उपनल व पीआरडी कर्मियों के जरिये भरा गया है। पर्यावरण पर्यवेक्षक के सृजित 20 पदों में कोई तैनाती नहीं है। पर्यावरण मित्र के 271 पदों में 54 कर्मी नियमित हैं। जबकि, अन्य आउटसोर्स व समिति के जरिये भरे गए हैं। वर्तमान में नगर निगम डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाले वाहनों की संख्या भी बढ़ा रहा है।

बनाई आदत तो सुधरेगी सूरत
यदि शहरवासियों ने अपनी आदत में स्वच्छता को अपनाया तो शहर की सूरत बदल जाएगी। हमें सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने के बजाय कूड़ेदान का उपयोग करना चाहिए। बच्चों को भी स्वच्छता की जानकारी दी जानी चाहिए। सड़क पर कूड़ा फेंकने से नालियों के चेक होने का खतरा बना रहता है। जिससे सड़क पर जलभराव जैसी स्थिति होती है।

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