हिंदी साहित्य में भूलाया नहीं जा सकता प्रेमचंद का योगदान

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार: स्वैच्छिक शिक्षक समूह की ओर से कथाकार स्व. मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर लघु संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान सदस्यों ने कहा कि हिंदी साहित्य के क्षेत्र में मुंशी प्रेमचंद का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन कार्यालय कोटद्वार में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. नंद किशोर ढौंडियाल ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का हिंदी साहित्य में योगदान अविस्मरणीय है और उनका परिचय किसी का मोहताज नहीं है। वे केवल कथाकार और उपन्यासकार ही नहीं अपितु एक शिक्षक और एक संपादक भी थे। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर राजीव थपलियाल, अमित गोयल, सौरभ सिंह, जागृति कुकरेती, लक्ष्मी नैथानी, सुरेश बिष्ट, यशपाल बिष्ट और रिद्धि भट्ट सहित समूह से जुड़े सभी शिक्षक मौजूद रहे।

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