हर जिले में होंगे सहकारिता सम्मेलन, किसानों से होगा सीधा संवाद

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– सहकारिता सम्मेलन में सहकारिता मंत्री ने नए विचारों को बढ़ाने पर दिया जोर अकेले देहरादून में 50 हजार लखपति दीदी बनाने का दिया लक्ष्य
देहरादून। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अवसर पर रविवार को यूसीएफ में सहकारिता सम्मेलन का आयोजन हुआ। बतौर मुख्य अतिथि सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि हर जिले में सहकारिता सम्मेलन आयोजित होंगे। इन सम्मेलनों में वे स्वयं किसानों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। सहकारिता सेक्टर में नए विचारों से नए मॉडल स्थापित करने वालों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। अकेले देहरादून में 50 हजार लखपति दीदी बनाई जाएंगी।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रदेश भर में सहकारिता के क्षेत्र में कार्यक्रम और जागरूकता संवाद कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। किसान और महिला सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि आप सभी सहकारिता के क्षेत्र में नए आइडिया के साथ एक मॉडल स्थापित करें। विभाग की ओर से हर सहायता और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
कहा कि देहरादून में 50 हजार लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। देहरादून में 401 ग्राम सभा में प्रत्येक ग्राम सभा स्तर पर बहुउद्देशीय समितियां बनाई जानी हैं। मत्स्य, डेयरी और बहुउद्देशीय समितियां बनाएंगी। किसानों को प्रगतिशील बनाने को भविष्य में युवा सहकारिता और जनजातीय सहकारिता सम्मेलन होंगे। वह हर जिले में स्वयं सहकारिता सम्मेलन में किसानों से सीधा संवाद करेंगे। कार्यक्रम में डीसीबी टिहरी के पूर्व अध्यक्ष सुभाष रमोला, मंजीत रावत, संयुक्त निबंधक मंगला त्रिपाठी, सहायक निबंधक राजेश चौहान, बलवंत मनराल, पुष्कर सिंह पोखरिया, सीके कमल आदि मौजूद रहे।
इन्हें मिला सम्मान: कार्यक्रम में कैतलया देवता महिला स्वयं सहायता समूह, कामयाब महिला स्वयं सहायता समूह भनियावाला को पांच पांच लाख का ऋण जीरो प्रतिशत ब्याज पर दिया गया। इसके साथ ही दीपिका नेगी चेतना महिला सहायता समूह, लक्ष्मी शर्मा नई दृष्टि स्वयं सहायता समूह, वकील हसन जैविक धान उत्पादन, मुकेश तोमर जैविक खेती, सूरत सिंह अदरक की खेती, कृष्ण स्वयं सहायता समूह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सिर्फ बातें करने से विकास नहीं होता : सहकारिता मंत्री ने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। यदि आपको बड़े कार्य करने हैं तो लकीर से बड़ी लकीर खींचनी होगी। सिर्फ बातें करने से विकास कार्य नहीं होते हैं। उसके लिए धरातल पर काम करने की जरूरत है। इसलिए जब आप मेहनत करें तो पीछे से आ रही रूकावटों को नजरअंदाज करना जरूरी है।

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