जल संस्थान कार्यालय में पार्षदों ने की तालाबंदी

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ऋषिकेश। जल संस्थान की ऋषिकेश देहात पेयजल योजना उपभोक्ताओं के लिए राहत कम, परेशानी का सबब ज्यादा बन गई है। उन्हें विभागीय कर्मचारी हर बार पानी का बढ़ा बिल थमा रहे हैं, जिसकी शिकायत पर भी बिलों की गड़बड़ियों में सुधार नहीं किया जा रहा है। नाराज उपभोक्ताओं ने शुक्रवार को पार्षदों के साथ जल संस्थान कार्यालय में प्रदर्शन किया। उन्होंने कार्यालय में सांकेतिक तालाबंदी करते हुए शीघ्र समस्या का सामधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी। शुक्रवार की सुबह हरिद्वार बाईपास मार्ग स्थित जल संस्थान कार्यालय पर एक दर्जन से ज्यादा पार्षदों के साथ स्थानीय पेयजल उपभोक्ता पहुंचे। पेयजल के बढ़े बिलों की शिकायत के समाधान के लिए उन्हें कार्यालय में कोई भी अधिकारी नहीं मिला, तो पार्षदों का पारा और भी ज्यादा चढ़ गया। उन्होंने कार्यालय में जल संस्थान अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। बारिश के बीच पार्षदों ने हर महीने पेश आ रही इस समस्या के निस्तारण नहीं होने से नाराज होकर कार्यालय में तालबांदी भी कर दी। कहा कि शीघ्र ही विभागीय अधिकारियों ने बिलों की गड़बड़ियों में सुधार नहीं किया, तो वह कार्यालय में फिर से तालाबंदी के लिए बाध्य होंगे। मालूम हो कि बीते 24 जुलाई को इसी समस्या को लेकर गीतानगर के लोगों ने भी पार्षद दिनेश रावत के साथ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों में पार्षद सुरेंद्र सिंह नेगी, सत्या कपरूवान, चेतन चौहान, प्रभाकर शर्मा, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सचबीर भंडारी, हर्षवर्धन रावत, दिनेश रावत, अजय दास, राजेश कोठियाल, पुष्कर बंगवाल, अभिनव मलिक, अनिल रावत, एकांत गोयल, विरेंद्र भारद्वाज, अमित उप्पल, नवीन नौटियाल आदि शामिल रहे। दावा: 80 फीसदी का सही आ रहा बिल जल संस्थान की देहात योजना का संचालन करने वाले अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में इस योजना के 9,800 कनेक्शन हैं, जिनमें 6,500 कनेक्शनधारकों का दो माह का बिल 449 रुपये आ रहा है, जबकि 1967 उपभोक्ताओं का यह बिल 680 रुपये औसतन है। कुछ स्थानों पर लीकेज और अन्य समस्या हो सकती है, जिसकी शिकायत पर निस्तारण किया जा रहा है। खपत के अनुसार ही लोगों को यह पेयजल बिल दिए जा रहे हैं। कोट वार्डों में पार्षदों के साथ ही हर महीने बैठक की जाती है, जिसमें उनसे समस्या और सुझाव लेकर उनका सामधान भी किया जा रहा है। कुछ लोगों ने महीनों से बिल जमा नहीं किए, जिससे उनका अधिक बिल आना स्वाभाविक है। बावजूद, किसी के बिल में दिक्कत है, तो वह कार्यालय में इसकी शिकायत कर समाधान पा सकता है। -नीरज त्रिपाठी, एई, जल संस्थान

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