नईदिल्ली, दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार धमाके में एक महिला डॉक्टर शाहीन सईद को भी एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है। फिलहाल वो राष्ट्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में है। जानकारी सामने आई है कि लखनऊ की रहने वाली शाहीन को आतंकी डॉक्टरों की टीम बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसने 5-5 डॉक्टरों की कुछ टीमे भी बनाई थीं और हर टीम का एक लीडर नियुक्त कर रखा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, शाहीन पकड़ में आने से बचने के लिए केवल टीम लीडर से ही बात करती थी। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि यह तरीका टीम की गोपनीयता बनाए रखने और किसी सदस्य के पकड़े जाने की स्थिति में दूसरी टीमों की पूछताछ से बचने के लिए थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि शाहीन ने कितनी टीमें बनाईं और कितने लोगों को भर्ती किया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शाहीन को भारत में पाकिस्तानी आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की महिला विंग जमात उल-मोमिनात बनाने का भी काम सौंपा गया था। इस विंग का कामकाज पाकिस्तान में जेईएम के संस्थापक मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर संभालती है। इसके अलावा शाहीन समूह की आर्थिक गतिविधियों को भी देखती थी। कथित तौर पर वो आतंकी गतिविधियों के लिए पैसे जुटाने की भी जिम्मेदारी संभाल रही थी।
आतंकी मॉड्यूल में शामिल लोग शाहीन को मैडम सर्जन के नाम से पुकारते थे। शाहीन महिला आतंकियों की एक टीम बनाना चाहती थी। इसके लिए उसने कुछ लड़कियों की सूची भी बनाई थी, जिनकी जानकारी उसकी डायरी में भी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शाहीन लड़कियों की टीम बनाने में सफल नहीं हो पाई। इसके बाद उसने ये जिम्मेदारी डॉक्टर मुजम्मिल को सौंप दी। किसे कितने पैसों की मदद करनी है, ये फैसला भी शाहीन ही लेती थी।
जांचकर्ताओं का मानना है कि समूह ने 35-40 लाख रुपये इक_ा किए थे, जिनमें से ज्यादातर कथित तौर पर शाहीन के नेटवर्क के माध्यम से जुटाए गए थे। जांच में सामने आया कि शाहीन का संपर्क कई संदिग्ध नेटवर्क से था, जिनका संबंध पाकिस्तान में बैठे आतंकियों से है। वो मुजम्मिल और अन्य लोगों के साथ मेडिकल कल्याण और एनजीओ चैनलों के जरिए बातचीत करती थी। हीन की कार से एके-47 राइफल, जिंदा कारतूस और अन्य सामग्री मिली थी।