लीगल एजुकेशन कमीशन बनाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने दिया मई में सुनवाई का भरोसा

Spread the love

नई दिल्ली , सुप्रीम कोर्ट लीगल एजुकेशन कमीशन बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर मई में सुनवाई का भरोसा दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह जनहित याचिका अच्छी है और इस पर गौर किया जा सकता है।
एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि एक ऐसा आयोग बनाया जाना चाहिए जिसमें कानून के जाने-माने जानकार शामिल हों और वे नए सिलेबस और पाठ्यक्रम तैयार करें, ताकि कानूनी शिक्षा को आधुनिक और सभी के लिए सुलभ बनाया जा सके।
याचिका में यह भी बताया गया है कि अब भी भारत में अधिकांश लॉ कोर्स पांच साल के इंटीग्रेटेड बीए-एलएलबी या बीबीए-एलएलबी प्रोग्राम के रूप में चल रहे हैं। एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जबकि अधिकांश कोर्स चार साल के होते हैं, पांच साल का यह कोर्स छात्रों के लिए समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ा देता है। खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्र इस लंबी अवधि और खर्च को लेकर परेशान हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी वजह से यह कोर्स सबसे बेहतरीन टैलेंट को अपनी ओर खींचने में नाकाम रह रहा है।
सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले पर कहा कि कानूनी शिक्षा एक अलग मुद्दा है और कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता भी एक अलग बात है। उन्होंने माना कि यह जनहित याचिका अच्छी है और इस पर गौर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे बेहतरीन टैलेंट पहले भी आ रहा है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि पांच साल का कोर्स अब पुराना और वित्तीय रूप से बोझिल हो गया है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी चार साल के अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रम को बढ़ावा देती है, लेकिन कानूनी शिक्षा अभी पुराने इंटीग्रेटेड कार्यक्रमों पर टिकी हुई है। याचिका का तर्क है कि अगर कानूनी शिक्षा को चार साल के कोर्स में बदला जाए तो इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों बचेगा और टैलेंट को आकर्षित करना भी आसान होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *