टिहरी। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कृषि बचाओ, लोक तंत्र बचाओ के तहत अखिल भारतीय किसान सभा की जिला कौंसिल टिहरी ने काले कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग उठाते हुये प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करते हुये वक्ताओं ने कहा कि आज 26 जून को संघर्ष के सात महीने पूरे होने पर खेती व लोकतंत्र बचाने की दोहरी चुनौती मुल्क के सामने है। किसानों ने कहा कि जब देश आजाद हुआ था। तब हम 33 करोड़ देशवासियों का पेट भरते थे। आज 140 करोड़ जनता को भोजन देते हैं। कोरोना महामारी के दौरान जब देश की बाकी अर्थव्यवस्था ठप हो गई। तब भी अपनी जान की परवाह किये बिना रिकार्ड उत्पादन किया। खाद्यान्न के भण्डार खाली नहीं होने दिए। लेकिन इसके बदले में देश की मोदी सरकार तीन ऐसे काले कानून जो हमारी नस्लों व फसलों को बरबाद कर देंगे, लेकर आई है। जो खेती को हमारे हाथ से छीनकर कम्पनियों की मुठ्ठी में सौंप देंगे। खेती के तीनों कानून असंवैधानिक हैं क्योंकि केन्द्र सरकार को कृषि मंडी के बारे में कानून बनाने का अधिकार ही नहीं है। यह कानून अलोकतांत्रिक भी है। वक्ताओं ने कहा कि किसान सरकार से दान नहीं मांग रहे हैं। अपनी मेहनत का सही दाम मांग रहे हैं। फसल के दाम में किसान की लूट के कारण खेती घाटे का सौदा बन गई है। किसानों की दूसरी प्रमुख मांग है कि किसानों को स्वामीनाथन कमीशन फॉर्मूले के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी पूरी फसल की खरीद की गारंटी मिले। सात महीने से केन्द्र सरकार ने किसान आंदोलन को तोड़ने के लिए लोकतंत्र की हर मर्यादा की धज्जियां उड़ाई हैं। वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार को तत्काल किसानों की न्याय संगत मांगों को स्वीकार करते हुए, तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द कर और एसएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रदर्शन में किसान सभा के जिला सचिव भगवान सिंह राणा, जगमोहन रांगड़, कृष्णा कठैत,अरूण कठैत, विक्रम कठैत, जसोदा सजवाण, अरुण राणा, जयेन्द्र चौहान व सीटू के जिलाध्यक्ष बिशाल सिंह राणा, श्रीपाल चौहान, अर्जुन रावत, जनवादी महिला समिति की संयोजिका दिला राणा आदि शामिल रहे।