जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : देहरादून में त्रिपुरा के एमबीए छात्र एंजल चकमा की नस्लवादी हिंसा में हुई हत्या के विरोध में शैलशिल्पी विकास संगठन ने कड़ा आक्रोश जताया। संगठन के सदस्यों ने झंडाचौक के समीप एकत्र होकर नस्लवाद का पुतला दहन किया और देश में किसी भी प्रकार के भेदभाव को अस्वीकार्य बताया।
वक्ताओं ने कहा कि 24 वर्षीय छात्र को नस्लवादी गालियां देकर मौत के घाट उतार दिया जाना न केवल अमानवीय है, बल्कि इससे पूरा प्रदेश शर्मसार हुआ है। उन्होंने चिंता जताई कि राज्य में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द व राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर खतरा हैं। संगठन ने कहा कि भारत का संविधान धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, भाषा और जन्मस्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का स्पष्ट रूप से निषेध करता है। ऐसी घटनाएं संविधान की मूल भावना के विरुद्ध हैं और देश की एकता, अखंडता तथा भाईचारे पर सीधा हमला हैं। वक्ताओं ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष विकास आर्य, डॉ. विक्रम चंद, प्रमोद चौधरी, राजेंद्र सिंह नेगी, अरविंद वर्मा, केशीराम निराला, मनवर लाल, धीरजधर बछवाण, मनोज सिंह, अनिल कुमार, सुधांशी थपलियाल, आशाराम, अनुज चौधरी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।