ऋषिकेश। मोक्षदायिनी गंगा को तीर्थनगरी ऋषिकेश में ही प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। यहां केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना पर करीब 230 करोड़ रुपये ट्रीटमेंट प्लांट पर खर्च कर चुकी है। बावजूद, चंद्रेश्वरनगर के पास ले की गंदगी सीधे गंगा में गिर रही है। इसको लेकर नाराज लोगों ने बुधवार को मल्टीस्टोरी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अधिकारियों पर नाले को टेप करने में अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी भी की। कहा कि यह नाला ढालवाला से होते हुए चंद्रेश्वरनगर तक पहुंच रहा है। यहां दूषित नाला एटीपी में जाने की बजाय सीधे गंगा में गिर रहा है। आक्रोशित लोगों ने बताया कि इसकी शिकायत वह नगर निगम व संबंधित विभाग से कई बार कर चुके हैं, लेकिन अभीतक गंगा में गिर रहे इस प्रदूषण की रोकथाम नहीं की जा सकी है। हैरानी जताई की नाले की जड़ में मल्टीस्टोरी ट्रीटमेंट प्लांट भी बना हुआ है। रघुनाथ झा ने बताया कि गंगा में गिरते गंदे नाले और कचरे को देख यहां घाट पर गंगा स्नान व आचमन को पहुंच रहे श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। हर दिन गंगा में गंदगी जाते देख उनका मन भी दुखी है। कहा कि केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपये इस तरह के नालों को टेप कर उनका दूषित पानी साफ करने के बाद गंगा में छोड़ने के लिए खर्च किए हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से सरकार की गंगा स्वच्छता मुहिम पर पलीता लग रहा है। प्रदर्शनकारियों में राधेश्याम साहनी, रोहित गुप्ता, समीर गुप्ता, जितेंद्र, हिमांशु रावत, संजय सिलस्वाल आदि शामिल थे।