तबाही मचा रही नदियां, विभाग को बजट का इंतजार

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बारिश के दौरान उफान पर बनी नदियों से हो रही भू-कटाव
सिम्मलचौड़ के समीप सुखरो नदी पर बने पुल को भी खतरा
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार: पहाड़ के साथ ही मैदान में हो रही बारिश से क्षेत्र की नदियां उफान पर बन रही है। ऐसे में नदियों के आसपास लगातार भू-कटाव का खतरा बना हुआ है। सुखरो व उसकी सहायक ग्वालगढ़ नदी के निचले इलाके में सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। सिमलचौड़ के पास सुखरो नदी से हो रहे कटाव से सुखरो पुल को खतरा बना हुआ है। साथ ही सत्तीचौड़ के संपर्क मार्ग भी नदी के बहाव की चपेट में आ रहे हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से वायक्रेट लगाकर पुल की सुरक्षा की जा रही है। लेकिन, खेती की जमीन को बचाने के लिए सिंचाई विभाग को बजट का इंतजार है। ऐसे में लगातार खतरा बढ़ता ही जा रहा है। जबकि, क्षेत्रवासी कई बार विभाग से व्यवस्थाओं को बेहतर बनवाने की भी मांग उठा चुके हैं।
बरसात के समय क्षेत्र की नदियां लगातार उफान पर बनी हुई हैं। सुखरो व ग्वालगढ़ नदी से सत्तीचौड़ से लेकर निंबूचौड़ और निचले इलाके में स्थित खूनीबड़ तक भूकटाव हो रहा है। कोटद्वार-भाबर मार्ग पर स्थित सुखरो मोटर पुल के पिलरों तक कटाव का खतरा बढ़ गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता डीपी सिंह ने बताया कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। फौरी इंतजाम कर नदी का रुख डायवर्ट किया जा रहा है। सुखरो नदी से निंबूूचौड़ के तटवर्ती इलाके को ज्यादा खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासी मीना देवी, शकुंता देवी का कहना है कि सत्तीचौड़ मार्ग की नदी उफान पर आने से मार्ग को भी खतरा बना हुआ है। अब तक सुखरो नदी कई बीघा जमीन अपने साथ बहाकर ले गई है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विनोद कुमार का कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान को रोकने के लिए बाढ़ सुरक्षा योजना बनाकर शासन को भेजी जा रही है। बजट मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

हर बार मिलता है केवल आश्वासन
सुखरो नदी से प्रत्येक वर्ष भारी नुकसान होता है। ऐसे में बरसात के दौरान अधिकारी व जनप्रतिनिधि जल्द ही सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम करने का आश्वासन देते है। लेकिन, बरसात खत्म होने के बाद इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता। जबकि, क्षेत्रवासी हर वर्ष बरसात से पूर्व सुरक्षा दीवार व अन्य व्यवस्थाएं करने की मांग उठाते रहते हैं।
नदी में समाया अधिकांश मार्ग x
सिम्मलचौड़ क्षेत्र के अंतर्गत सुखरो नदी के आसपास आबादी क्षेत्र को जाने वाला अधिकांश मार्ग नदी की भेंट चढ़ चुका है। गत वर्ष पुल के नीचे मार्ग का अधिकांश हिस्सा बह गया था। ऐसे में अब यह मार्ग केवल पैदल चलने व दोपहिया की आवाजाही के लायक ही बचा हुआ है। शिकायत के बाद भी सिस्टम ने मार्ग के आसपास सुरक्षा दीवार बनाने की सुध नहीं ली।

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