नई दिल्ली। नए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति में सरकार के हस्तक्षेप और पारदर्शिता के भंग होने का आरोप लगा रहे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने भाजपा भी ‘आईना’ लेकर खड़ी हो गई है। वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया को विधि-सम्मत बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खरे-खरे शब्दों में कहा कि राहुल गांधी का यह नया राग मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर विवाद पैदा करने और दुष्प्रचार करने का एक और प्रयास है।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से प्रश्न पूछा- क्या राहुल गांधी भूल गए हैं कि कांग्रेस शासन के दौरान ईसी की नियुक्ति कैसे होती थी? दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने चयन तंत्र में सुधार के लिए कुछ क्यों नहीं किया? केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘एक्स’ पर लिखे पोस्ट में आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए अपनी सुविधानुसार संविधान को कुचल दिया।
‘कांग्रेस ने कभी बाबा साहेब के उपहास का मौका नहीं छोड़ा’
कांग्रेस ने कभी भी बाबा साहेब आंबेडकर का उपहास और अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा, फिर भी कांग्रेस के युवराज में यह रवैया दिखाने का दुस्साहस है।
सीईसी की नियुक्ति में सरकार के दखल के आरोपों को खारिज करते हुए प्रधान ने कहा कि यह पहली बार है कि सीईसी की नियुक्ति संसद में पारित कानून द्वारा की गई है। यह हमारी सरकार है, जिसने सीईसी और ईसी की नियुक्ति के लिए एक संयुक्त प्रणाली बनाई है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हैं।
यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि राहुल गांधी और कांग्रेस किसी भी नियम-कानून को न तोड़ने पर भी रोते हुए बच्चों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वहीं, भाजपा आइटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय राहुल गांधी की असहमति को राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया।
‘तब पीएम मी सिफारिश पर होती थी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति’
दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में राष्ट्रपति केवल प्रधानमंत्री की सिफारिश पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करते थे, जबकि वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समावेशी है, जिसमें विपक्ष के नेता सहित कई हितधारक शामिल हैं।