नई टिहरी। देवप्रयाग के रामपुर-श्यामपुर गांव की दिव्यांग ऋतु ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो वरखेड़ी से मुलाकात कर अपने शोध कार्य पर चर्चा की। ऋतु जन्मांध है। दिव्यांग ऋतु ने ऋतु ने देहरादून स्थित राष्ट्रीय बाधितार्थ संस्थान से बारहवीं के बाद दिल्ली विवि से स्नातक, जेएनयू से संस्कृत में एमए व फिर दिल्ली विवि से पीएचडी की। केंद्रीय संस्कृत विवि के श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग में वह आती रही हैं। ऋतु अपनी मां व पिता संत सिंह जियाल व अन्य परिजनों के साथ कुलपति प्रो वरखेड़ी से मिली। ऋतु इस दौरान काफी भावुक भी हो गयी। ऋतु ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि वह 12 परिसरों वाले विश्वविद्यालय के कुलपति से इतनी सहजता से मिलेंगी। ऋतु ने अपने शोध के विषय में कुलपति को बताया। उन्होंने कुलपति को भगवान बदरीनाथ का चित्र भी भेंट किया। वहीं कुलपति प्रो वरखेड़ी ने ऋतु को शॉल ओढ़ाकर कर सम्मानित करते हुए कहा कि उनमें कोई कमी नहीं है। सफलता के वह बहुत निकट हैं। ऋतु ने अपनी प्रतिभा का सदुपयोग किया है। संस्कृत जगत की वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए वह प्रेरणा का कार्य करेंगी। पहाड़ में जन्म लेने वाली इस बेटी ने शारीरिक बाधा होने पर भी हार नहीं मानी। इनसे बड़ा विजेता कौन हो सकता है। कुलपति ने ऋतु को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वह अपने क्षेत्र व समाज का गौरव है व संस्कृत जगत की सच्ची सेविका भी। कुलपति प्रो वरखेड़ी ने ऋतु को विलक्षण बालिका बताते कहा की उसकी शास्त्र पर गहरी पकड़ है।