दिव्यांगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर योजनाओं से लाभान्वित करें : डीएम

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जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में सोमवार को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों तथा दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में लंबित प्रकरणों की स्थिति, उपलब्ध सेवाओं, लाभार्थियों की प्रगति एवं आगामी कार्य योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद के सभी दिव्यांगजनों का समग्र डेटाबेस तैयार किया जाए, जिसमें उनके प्रमाणपत्र, यूडीआईडी कार्ड, सहायक उपकरण, स्वरोजगार एवं अन्य सुविधाओं का विवरण शामिल हो, ताकि उन्हें योजनाओं का समुचित लाभ उपलब्ध कराया जा सके।
दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने दिव्यांगजनों को स्वरोजगार से जोड़ने की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए। कहा कि शिविरों का आयोजन कर विभिन्न योजनाओं एवं स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी जाए, जिससे इच्छुक दिव्यांगजनों को योजनाओं से लाभान्वित कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। डीएम ने कहा कि जिन दिव्यांगजनों के विशिष्ट दिव्यांग पहचान पत्र (यूडीआईडी) अभी तक नहीं बने हैं, उनके लिए विशेष अभियान चलाकर कार्ड बनवाएं जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों के लिए पर्याप्त मात्रा में कृत्रिम अंग उपलब्ध रखे जाएं तथा आवश्यकता अनुसार उपकरण उपलब्ध कराने हेतु जिला योजना के अंतर्गत प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। बैठक में पुलिस अधीक्षक अनूप काला, जिला समाज कल्याण अधिकारी रोहित सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी जितेंद्र कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल, अपर समाज कल्याण अधिकारी अनिल सेमवाल, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के सदस्य गेंदालाल टम्टा, नरेंद्र टम्टा, अंकित घाघट सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए समयबद्ध निस्तारण करें
जिलाधिकारी ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए सभी प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करें। उन्होंने पुलिस विभाग को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही गैर-सरकारी सदस्यों से संवाद करते हुए कहा कि वे ऐसे प्रकरणों को बैठक में सक्रिय रूप से उठाएं तथा पीड़ितों की आवाज बनकर उनके हितों की रक्षा करें। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जांच एवं कार्रवाई में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए तथा आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

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