जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों की दहशत थमने का नाम नहीं ले रही। हालत यह है कि विकासखंड जयहरीखाल के दर्जनों गांव में इन दिनों भालूओं की धमक बनी हुई है। दहशत में जी रहे ग्रामीणों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। मवेशियों के लिए चारापत्ती एकत्रित करना भी चुनौती बनती जा रही है। लगातार शिकायत के बाद भी वन विभाग समस्या को लेकर लापरवाह बना हुआ है। ऐसे में जंगली जानवर कब किसकी जिंदगी पर भारी पड़ जाए, कहा नहीं जा सकता।
ग्राम चाई, बेबड़ी, जुई, घाघसी, मठाली, गिंवाली सहित आसपास के क्षेत्र में पिछले 15 दिन से भालूओं की धमक बनी हुई है। चाई के ग्राम प्रधान अशोक बुड़ाकोटी ने बताया कि गांव के आसपास खेतों में लगातार दो भालू घूमते हुए नजर आ रहे हैं। ग्रामीण पशुओं के लिए चारा पत्ती लाने के लिए अपने खेतों में भी नहीं जा पा रहे हैं। कुछ दिन पूर्व भालू गांव में स्थित पानी की टंकी के समीप दिखाई दिया। ऐसे में ग्रामीणों की दिनचर्या भी प्रभावित होने लगी है। भालू व गुलदार के डर से ग्रामीण बच्चों को स्कूल भेजने व लेने के लिए स्वयं ही जा रहे हैं। शाम होते ही गांव में पूरी तरह सन्नाटा छा जाता है। बताया कि इस संबंध में ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी लैंसडौन को भी पत्र भेजा था। लेकिन, अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने जंगली जानवरों से निजात के लिए गांव में वन कर्मियों की तैनाती करवाने की मांग की है। कहा कि पिंजरा लगाकर भालू को पकड़ा जाना चाहिए।