पर्यावरण विशेषज्ञ विज्ञानी डॉ. एचएस कप्रवान के निधन पर किया शोक व्यक्त

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रुद्रप्रयाग। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ विज्ञानी डॉ. एचएस कप्रवान का शनिवार शाम को ग्रेटर नोएडा स्थित प्रकाश अस्पताल में लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। उनके निधन पर विभिन्न संगठनों ने शोक व्यक्त कर पर्यावरण के क्षेत्र में उनके कार्यों को याद किया। सामाजिक कार्यकत्र्ता श्याम लाल सुंद्रियाल ने बताया कि स्व. कप्रवान जिला मुख्यालय से सटे ग्राम सभा बौंठा के निवासी थे, जो लंबे समय से नोएडा सेक्टर 70 में निवासरत थे। वह किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। डॉ. कप्रवान डीआरडीओ में एडिशनल डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। बताया कि डॉ. एचएस कप्रवान ने वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने में मुख्य लेखक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी के तहत राजेंद्र पचौरी अलगोर की संयुक्त टीम को नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया था। उस टीम में डॉ. कप्रवान भी शामिल थे। वह केदारनाथ आपदा एवं नीती घाटी की आपदा के बारे भी पहले ही भविष्यवाणी कर चुके थे। वह उत्तराखंड हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं पर हो रहे व्यापक जलवायु परिवर्तन को लेकर भी सरकारों को चेताते रहे हैं। वह सदैव जलवायु परिवर्तन में कमी लाने के लिए विकसित राष्ट्रों की भूमिका पर ज्यादा जोर देते रहे। श्याम लाल ने ने पर्यावरण विशेषज्ञ विज्ञानी के निधन को अपूरणीय क्षति बताया। उनके निधन पर गढ़वाल केंद्रीय विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष एसपी काला, पूर्व केंद्रीय अपर भविष्य निधि आयुक्त वी शर्मा, राजेंद्र जगवाण, बृजेश सती, विनोद कप्रवान, रमेश पहाड़ी, एसएस भंडारी, जगत सिंह जंगली समेत कई व्यक्तियों ने शोक संवेदना व्यक्त की है।

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